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अब अपना ही सूबा प्यारा लगे

पेट पालने के लिए पंजाब मुम्बई, पुणे और असम में मजदूरी करने गए लोग अब घर पर रहकर रोी-रोटी का जुगाड़ करने में लगे हैं। मजदूरों की टोलियां धीर-धीर लौटने लगी हैं। उन्हें अपना सूबा ही प्यारा लगने लगा है।ड्ढr पानीपत की एक फैक्ट्री में कामकर लौटे तरारी प्रखंड के केशवपुर निवासी शंकर यादव बताते हैं कि कड़ी मेहनत के बाद भी वहां तीन से चार हाार रुपए मिलते है।ड्ढr ड्ढr महाराष्ट्र के मुम्बई व गुजरात के सूरत में मजदूरी कर लौटे डिहरा निवासी रामउमेद, दुसाधी बधार निवासी शिवजी साह व संतोष सिंह बताते हैं कि काम की तलाश में बाहर गये थे। कड़ी परिश्रम कर दस से बारह घंटे तक प्रतिदिन काम किया, मेहनताना प्राप्त करने के बाद तमाम खर्चो को काटने पर कुछ भी नहीं बचा, फिर मनसे के सदस्यों का आतंक बर्दाश्त करना पड़ा। ऐसे में लौटने के सिवाय कोई रास्ता नहीं था। गांव आकर अब खेतों में काम कर रहे हैं।ड्ढr ड्ढr वहीं देखा-देखी पंजाब के एक गांव में गये रामनगर निवासी प्रेम कुमार बताते हैं कि बतौर पर्यवेक्षक खेतों में काम किया। गालियां सुननी पड़ती थी। ऐसे में गांव आकर स्क्रिन पिंट्रिंग शुरू करने का इरादा है। दुसाधी बधार निवासी संतोष सिंह एक माह पहले हाउस गार्ड की नौकरी छोड़ कर आये है। बताते हैं कि दस-बारह घंटे जबर्दस्त काम लिया जाता है। पगार भी कम दी जाती है और हिकारत भरी नजरों से देखा जाता है। गांव आने के बाद मशरुम उगाने की योजना बना रहे हैं। इस संबंध में श्रम अधीक्षक जयंत कुमार का कहना है कि पलायन रोकने के लिए विभाग सतत प्रयत्नशील है। 5 हाार मजदूरों का जून माह में नि:शुल्क बीमा कराया जायेगा तथा सरकारी व गैर सरकारी योजनाओं में कार्य करने वाली एजेन्सियों से एक प्रतिशत राशि लेकर मजदूरों के कल्याण में लगाया जाएगा।ं

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