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घोड़ी पर चढ़ेगा दूल्हा

अखबारों में छपी खबर के अनुसार राजस्थान में दलितों को बारात के समय भी दूल्हे को घोड़ी पर बैठने की अनुमति नहीं है और इतना ही नहीं, दंबगों के घरों मोहल्लों से निकलते समय दूल्हे को घोड़ी से उतर कर पैदल चलने को मजबूर होना पड़ता है। ऐसी खबरं गाहे-बगाहे अखबारों में छपती रहती हैं। कहा तो यहां तक जाता है कि राजस्थान में अनेक छोटे-मोटे होटलों पर दलितों को आम क्रॉकरी में चाय, खाना तक नहीं दिया जाता। उनके लिए अलग बरतन रखे जाते हैं तथा दलितों को ही उन्हें धोकर खाना पड़ता है। इतना ही नहीं दलित सवर्णो के सामने धोती बांध कर नहीं चल सकता, चारपाई पर नहीं बैठता। दलित को पूरी तरह सवर्णो के रहमोकरम पर जीने को मजबूर होना पड़ता है। हम कानून बनाकर सब कुछ ठीक होने की डींगे तो हांकते हैं, पर जो हो रहा है उसे रोकने के लिए कोई भी कानून या सरकारी मशीनरी दलितों के साथ नहीं होती। आखिर यह अमानवीय व्यवहार दलित कब तक सहेगा? राजस्थान के दौसा जिले के चौकड़ी परिवार के दलितों ने इस व्यवस्था को चुनौती देकर एक साहसिक कार्य किया है। उन्हें सहायता उपलब्ध कराई जानी चाहिए।ड्ढr इन्द्र सिंह धिंगान, किंगवे कैंप, दिल्ली चुनावी गणित जब-ाब चुनाव आते हैं, चुनावों के लिए राजनीतिक दल चुनावी चंदा बाजार से वसूलते हैं। इससे महंगाई बढ़ती है,ािसे गणित को शेषन ने हल किया था, वह हम भूल चुके हैं। अब चुनाव फिर सामने हैं, जिसे महंगाई ने थामा है। ऐसे में अगर दाम नहीं बढंगे तो बाजार द्वारा दिया गया चुनावी-धन कैसे वसूल होगा? घाटे का सौदा कोई क्यों करगा?ड्ढr ओम प्रकाश त्रेहन, मुखर्जी नगर, दिल्ली महंगाई और गैर सरकारी कर्मी बढ़ती महंगाई की जो मार आज आम आदमी झेल रहा है उसमें सबसे बड़ी भूमिका सरकारी मशीनरी द्वारा ईााद की जा रही गलत नीतियों की है! सरकारी मैनेजमेंट खामियों से भरा पड़ा है, जिसके कारण समृद्ध तबके की समृद्धि को बढ़ती जा रही है, किंतु निचले तबके की दशा दिन-प्रतिदिन बिगड़ रही है। अब छटे वेतन आयोग वाली नीति को ही देखें तो पाएंगे कि इसके लागू होते ही बेतहाशा महंगाई बढ़ेगी। निजी क्षेत्र में कार्यरत सरकारी कर्मियों में कई गुना ज्यादा कर्मियों की दशा बदतर होने वाली है, क्योंकि छठे वेतन आयोग का उनसे कोई सरोकार नहीं है। क्या सरकार सिर्फ सरकारी कर्मचारियों को ही नौकरी-पेशा समझती है निजी क्षेत्र के कर्मियों को नहीं?ड्ढr अनन्त उनियाल ‘आनन्द’, दिल्ली सरकारी महंगाई महंगाई तो फिर बढ़ गई। मैं सरकारी आंकड़ों की बात कर रहा हूं। बाकी जगह तो वह हर रो बढ़ती रहती है। उस महंगाई की बात तो कभी सुनी ही नहीं जाती, जो हर रो हमारी जेब काटती है। अच्छा होगा कि सरकार अब अपने आंकड़ों की बात ही सुन ले। लेकिन मुश्किल यह है कि सरकार जब सचमुच इसे सुनकर कुछ करती है तो उसकी कार्रवाई महंगाई को घटाने के बजाए बढ़ाती ही है। पिछले काफी समय से तो यही हो रहा है। सरकार महंगाई को नहीं समझती, या समझना नहीं चाहती।ड्ढr आदित्य बंसल, वसुंधरा, गाजियाबाद राजनीति में राहुल दिल बहलाने को गालिब ये खयाल अच्छा है।ड्ढr विरोधी कहते हैं, राजनीति में राहुल बच्चा है।।ड्ढr मोहम्मद असलम, रायबरलीं

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