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उच्च शिक्षा का सपना हकीकत में बदलेगा

गांव की बेटियां अब शादी-ब्याह के लिए ही ‘पढ़ाई’ के बैरियर को तोड़कर उच्च शिक्षा के सपने को हकीकत में बदल सकेंगी। सरकार की नजर उन बच्चियों पर खास तौर से है जो मैट्रिक से आगे की शिक्षा की हसरत पूरी नहीं कर पातीं। बिहार विद्यालय शिक्षा समिति के आंकड़ों के मुताबिक मैट्रिक की परीक्षा में जहां लगभग सात लाख छात्र-छात्राएं शामिल होती हैं वहीं इंटरमीडिएट में यह घटकर 4 लाख रह जाती है। यानी तीन लाख छात्र-छात्राएं इंटर में दाखिला ही नहीं ले पातीं। इनमें आधी अर्थात लगभग डेढ़ लाख लड़कियां होती हैं। कारण कि इनके मां-बाप शादी की अनिवार्यता के लिए मैट्रिक तक तो किसी तरह इन्हें पढ़ा देते हैं मगर इंटर के लिए दूर के स्कूल-कालेजों में भेजने का हौसला नहीं जुटा पाते।ड्ढr मानव संसाधन विकास विभाग इस ‘ड्रापआउट’ को दूर करने में जुटा है। मंत्री और प्रधान सचिव समेत विभाग के अन्य अधिकारियों की बैठक में यह बात सामने आई कि इसकी मुख्य वजह घर से स्कूलों की अधिक दूरी है। लिहाजा अब प्रमंडल, जिला और अनुमंडल मुख्यालय की जगह ब्लाक और पंचायतस्तर के हाईस्कूलों को जमा दो में अपगड्र किया जाएगा। इसके तहत 1168 हाईस्कूलों का टेकओवर किया जाना है। इनके चयन के लिए तय नए फामरूले में आबादी का मेन रोल होगा। जिन ब्लाकों में पंचायतों की संख्या अधिक होगी जमा दो स्कूल भी वहीं खुलेंगे। साथ ही सबसे अधिक आबादी वाली पंचायतों के हाईस्कूल को ही इसके योग्य माना जाएगा।ड्ढr ड्ढr इस बार में जिला शिक्षा पदाधिकारियों (डीईओ) को जरूरी निर्देश दिए गए हैं। जानकारी के अनुसार सरकार की योजना हर तीन-चार गांव पर एक हाईस्कूल और उसीमें इंटर की पढ़ाई शुरू करने की है। इसके मद्देनजर डीईओ को वैसे इलाके चिह्न्ति करने को कहा गया है जहां 5 से 8 किलोमीटर के दायर में स्कूल नहीं हैं।

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