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आंगनबाड़ी केंद्रों का होगा कम्पीटिशन

अब राष्ट्रीय स्तर पर कम्पीटीशन से तय होगा आंगनबाड़ी केन्द्रों का मॉडल। देश के दिग्गज आर्किटेक्ट अपना हुनर दिखायेंगे। टॉप मॉडल को मिलेगा एक लाख का पुरस्कार, दूसर और तीसर पुरस्कार से नवाजे गये मॉडलों के निर्माता भी पाएंगे क्रमश: पचास और पच्चीस हाार रुपये। अगर आप समझ रहे हैं कि बात यहीं खत्म हो जायेगी तो आप भूल में हैं। असली काम तो अब शुरू होगा।ड्ढr ड्ढr अब चयनित तीनों मॉडलों की खूबियों को मिलाकर बनेगा आंगनबाड़ी केन्द्रों के लिए ‘बिहार मॉडल’ जो बेमिसाल होगा। देशभर में पहली बार आजमाये जाने वाले इस प्रयोग का उद्देश्य है भवन को आंगनबाड़ी के उद्देश्यों के अनुकूल और चाइल्ड फ्रेंडली बनाना। इसके लिए सरकार ने प्रयास शुरू कर दिया है और पांच जून तक इसे पूरा कर लेना है। समाज कल्याण विभाग के प्रधान सचिव विजय प्रकाश ने बताया कि सरकार ने राज्य के लगभग सभी 80 हाार आंगनबाड़ी केन्द्रों का अपना भवन बनाने का फैसला लिया है। सरकार का लक्ष्य है कि आंगनबाड़ी केन्द्रों की दीवारों से लेकर आंगन तक चाइल्ड फ्रेंडली हों। यह बच्चों के विकास में सहायक होगा। इसी सिलसिले में राज्य का अपना मॉडल तैयार करने के लिए देश भर के आर्किटेक्टों के बीच प्रतियोगिता कराने का निर्णय लिया गया है। प्रतियोगिता में भवन डिााइनिंग में रुचि रखने वाले छात्र और युवक भी भाग ले सकते हैं।ड्ढr ड्ढr इसके लिए यह जरूरी नहीं है कि उनके पास कोई डिग्री या सर्टिफिकेट हो। प्रथम फेा में 22 हाार केन्द्र बनाये जायेंगे। इसके लिए सरकार नाबार्ड से 466 करोड़ रुपये र्का लेगी। 16 हाार केन्द्र तो वर्तमान में चल रहे स्कूलों के परिसर में बनेंगे लेकिन शेष के लिए जमीन की तलाशी जा रही है। जहां गैरमजरुआ जमीन होगी वहां तो कोई परशानी नहीं होगी लेकिन जहां यह व्यवस्था नहीं है वहां गा्रमीणों को जमीन देने के लिए प्रेरित किया जायेगा। प्रधान सचिव ने बताया कि भूमिदाता अगर चाहें तो उनका नाम भी केन्द्र पर अंकित किया जायेगा।

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