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राजभवन ने वीसी से मांगी रिपोर्ट

रांची विश्वविद्यालय के वर्तमान हिन्दी विभागाध्यक्ष के मामले में राजभवन ने कुलपति से दो सप्ताह के अंदर रिपोर्ट मांगी है। रिपोर्ट मिलने तक हाइकोर्ट में दाखिल शपथ पत्र के अनुसार स्थिति बरकरार रखने को कहा गया है। रांची विवि के कुलसचिव ने 23.03.2006 को रिट याचिका (संख्या 5461 2005) में एक प्रतिशपथ पत्र झारखंड हाईकोर्ट में दायर किया था। इसमें कहा गया है कि विवि के हिन्दी विभाग में डॉ ऋता शुक्ल डॉ रविभूषण प्रसाद पांडेय से वरीय हैं। इस संबंध में पूछे जाने पर रांची विवि के कुलपति डॉ एए खान ने बताया कि राजभवन से पत्र मिला है। समय पर इसकी रिपोर्ट देंगे। राज्यपाल के प्रधान सचिव अमित खर ने 30 अप्रैल को वीसी को भेजे पत्र में कहा है कि रांची विवि के कुलपति ने राजभवन को सूचित किया कि डॉ प्रसाद की व्याख्याता पद पर नियुक्ित की तिथि 05.07.1तथा कालबद्ध प्रोन्नति योजना अंतर्गत उपाचार्य तथा विश्वविद्यालय प्राचार्य के पद पर उनकी प्रोन्नति क्रमश: 01.02.1एवं 05.07.1ी तिथियों से है। डॉ ऋता शुक्ल की नियुक्ित व्याख्याता के पद पर दिनांक 03.0ो हुई एवं कालबद्ध प्रोन्नति योजनान्तर्गत उपाचार्य तथा विश्वविद्यालय प्राचार्य के पद पर उनकी प्रोन्नति क्रमश: 03.0एवं 08.12.1ी तिथियों से हुई। इसके अनुसार डॉ प्रसाद, डॉ शुक्ल से वरीय हैं। पत्र में लिखा है कि इस विषय पर दो महत्वपूर्ण बिंदु यह उठते हैं कि ( क) रांची विवि द्वारा तिलका मांझी भागलपुर विवि के पत्र के आलोक में डॉ पांडेय रविभूषण प्रसाद को विभाग में सबसे वरीय मानने का जो निर्णय लिया गया है वह वरीयता निर्धारण समिति द्वारा लिया गया है अथवा नहीं। किस आधार पर बिहार के विवि के पत्र के आलोक में रांची विवि अपने शिक्षकों की वरीयता का निर्धारण कर रहा है। (ख) यदि रांची विवि द्वारा वर्ष 2007 में डॉ पांडेय रविभूषण प्रसाद को सबसे वरीय माना गया है, तो वैसी स्थिति में विवि द्वारा हाइकोर्ट में नया शपथ पत्र दाखिल करना चाहिए था। अभी स्थिति यह है कि हाइकोर्ट में रिट संख्या 5461 2005 में कुलसचिव द्वारा शपथ पत्र के अनुसार डॉ ऋता शुक्ल सबसे वरीय हैं जबकि विवि की आंतरिक व्यवस्था के अनुसार डॉ प्रसाद वरीय हैं। इस प्रकार के विरोधाभास से विवि की छवि प्रभावित होती है।

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