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शादी का परमिट दिला रही मध्यमा परीक्षा

राज्य में शादी-विवाह में ननमैट्रिक लड़कियां वर पक्ष को नहीं भा रहीं। रिश्ते के लिए जरूरी है कि लड़की कम से कम दसवीं पास तो हो ही। अब सभी अभिभावक रगुलर कक्षा करवाकर अपनी बेटियों को यह उपलब्धि दिला नहीं सकते। साधन और सामथ्र्य दोनों आड़े आता है और बिना पढ़े बेटी बिहार बोर्ड से मैट्रिक हो नहीं सकती। लेकिन बिहार में हर मर्ज की दवा लोग खोज ही लेते हैं और मध्यमा बोर्ड अभिभावकों के लिए इस परशानी को दूर करने का बड़ा जरिया हो गया है।ड्ढr इस परीक्षा के द्वारा बिहार की बेटियों को शादी का परमिट मिल रहा है। आप जानकर दंग रह जाएंगे कि वर्तमान में चल रही परीक्षा में करीब सवा लाख लड़कियां इम्तहान में बैठी हैं।ड्ढr ड्ढr शादी की आवश्यक शर्त के साथ ही शिक्षक नियुक्ित और पंचायत व निकाय चुनावों में महिलाओं के आरक्षण ने मध्यमा परीक्षा क्रज और बढ़ाया है। अब लड़के-लड़कियां बिना पढ़े तो बिहार विद्यालय परीक्षा समिति की परीक्षा में पास कर नहीं सकते। साथ ही ऐसे भी छात्रों की संख्या अधिक है जो क्लास किए बगैर मैट्रिक पास कहलाना चाहते हैं। उनके लिए मध्यमा परीक्षा एक वरदान साबित हो रहा है।ड्ढr ड्ढr बिहार राज्य संस्कृत बोर्ड के सचिव श्रीनिवास चंद्र तिवारी बताते हैं कि बोर्ड छात्रों को स्वतंत्र रूप से परीक्षा देने की सुविधा उपलब्ध कराता है। हमारा सिलेबस अन्य बोर्डो के सिलेबस से काफी हल्का है। एक से दो माह की पढ़ाई से ही छात्र इस परीक्षा को पास कर सकते हैं। अच्छे अंक से पास करने की संभावना अधिक होती है जिससे छात्राओं का रुझान अधिक है। वे भी मानते हैं कि मध्यमा की परीक्षा में 20 से 25 साल की छात्राओं की संख्या सबसे अधिक है। इस बार 1,13,162 छात्राएं परीक्षा दे रही हैं जबकि छात्रों की संख्या करीब 0,144 है। परीक्षा दे रही शांति, मोना, सुषमा व मनीषा ने स्पष्ट कहा कि मैट्रिक परीक्षा में पास नहीं हो पायी तो यह परीक्षा दे रही हूं। वहीं अपनी बेटियों अनु व श्वेता की परीक्षा दिलाने आए माधव प्रसाद ने कहा कि शादी के लिए ही यह परीक्षा दिला रहा हूं।ं

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