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आधी आबादी को हक की पहल

महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान वाला संविधान संशोधन विधेयक अभूतपूर्व हंगामे और हाथापाई के बीच मंगलवार को राज्यसभा में पेश किया गया। केन्द्रीय कानून मंत्री हंसराज भारद्वाज से समाजवादी पार्टी के कुछ सदस्यों ने विधेयक की प्रति छीनने की कोशिश तक की और उनके बचाव में आए सत्तापक्ष के सदस्यों से गुत्थमगुत्था हो गए। पीठासीन अधिकारी ने जसे ही कानूनमंत्री को महिला आरक्षण संबंधी 108 वां संविधान संशोधन विधेयक पेश करने के लिए पुकारा तो सपा सदस्य मंत्री को विधेयक पेश करने से रोकने का प्रयास करने लगे। इस दौरान सत्ताधारी कांग्रेस और सपा सदस्यों के बीच धक्कामुक्की और हाथापाई भी हुई।ड्ढr ड्ढr सपा सदस्यों ने उसने विधेयक की प्रति छीनने की कोशिश की और उनके बचाव में मंत्रिपरिषद में उनकी सहयोगी रेणुका चौधरी, कुमारी शैलजा, पानाबाका लक्ष्मी और कांग्रेस सदस्य प्रभा ठाकुर और जयंती नटराज दीवार बन कर खड़ी थीं। श्रीमती चौधरी ने तो मंत्रियों की कुर्सियों के सामने चढ़ आए कई सपा सदस्यों को धक्के देकर पीछे किया। प्रधानमंत्री एवं सदन के नेता मनमोहन सिंह की मौजूदगी में माहौल इतना अराजक हो गया कि पीठासीन अधिकारी भी हक्का-बक्का रह अजीबोगरीब तमाशा देखते रह गए। पीठासीन अधिकारी पी जे कुरियन द्वारा सदस्यों की सम्मति मांगने के साथ ही विधेयक ध्वनिमत से पेश कर दिया गया। इस दौरान सपा के कुछ सदस्य कुछ कागजात फाड़ते देखे गए। जदयू के शरद यादव भी अपने स्थान पर खड़े होकर कोई कागज फाड़ते नजर आए। सपा के अबू आसिम आजमी का आक्रामक रुख रोके नहीं रुक रहा था।ड्ढr ड्ढr कांग्रेस के हनुमंत राव को आजमी का कुर्ता पकड़ कर उन्हें पीछे खींचते देखा गया। इस बीच भाजपा के मुख्य सचेतक एस एस अहलूवालिया भी वहां पहुंच गए और उन्होंने आजमी को अपने स्थान पर जाने के लिए कहा। भाजपा के सभी सांसदों ने पूर्व घोषित नीति के अनुसार महिला आरक्षण विधेयक का पूरा समर्थन किया। विधेयक पेश होने के बाद कुरियन ने सदन की कार्यवाही दो बजे तक स्थगित कर दी। केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने शनिवार की रात प्रधानमंत्री के निवास पर हुई आपात बैठक में विधेयक को मंजूरी दी थी। विधेयक में संसद और राज्य विधानमंडलों में महिलाओं के लिए एक तिहाई सीटों के आरक्षण की व्यवस्था 15 वर्ष के लिए रखने का प्रस्ताव है। विधेयक में कहा गया है कि 108वां संशोधन अधिनियम 2008 के उपबंध आरंभ से 15 वर्ष की अवधि की समाप्ति पर प्रभावी नहीं रहेंगे। उधर राजद के राजनीति प्रसाद सपा सदस्यों के हंगामे के कारण विधेयक पर अपना वक्तव्य नहीं दे सके। सदन में अवसर न मिलने पर उन्होंने अपने नेता लालू प्रसाद के सुझाव पर इसकी प्रति पत्रकारों में बांटी जिसमें इस विधेयक का पुरजोर विरोध किया गया है। राजद सदस्य ने कहा कि यह विधेयक अवसर की समानता के खिलाफ, संविधान की मूल भावना के विपरीत और समाज में असमानता को बढ़ाने वाला है। अत: मैं इसका पुरजोर विरोध करता हूं।

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  • Web Title: आधी आबादी को हक की पहल