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डेडलाइन नहीं तो डील नहीं: यूएस

भारत-अमेरिकी असैन्य परमाणु करार पर सरकार व वाम दलों के बीच वार्ता अब नाजुक दौर में पहुंच गई है। बुश प्रशासन ने भारत सरकार को इस बात से अवगत करा दिया है कि यदि भारत सरकार अमेरिकी कांग्रेस के कलैंडर का पालन नहीं कर पाती तो 123 एटमी समझौते को खत्म माना जा सकता है।ड्ढr ड्ढr इसका अर्थ है कि जार्ज बुश के उत्तराधिकारी ही भारत से नए सिर से एटमी ऊरा समझौता कर सकेंगे। इस परिस्थिति के मद्देनजर यूपीए सरकार वाम दलों को मनाने की हर कोशिश में जुटी है। एटमी करार पर वाम यूपीए की अगली बैठक अब 28 मई को रखी गई है। भारत की नीति अकेले अमेरिका से करार करने की नहीं। वह अपनी एटोमिक ऊरा की जरूरत पूरी करने की खातिर अमेरिका के साथ साथ रूस, जर्मनी और फ्रांस आदि से भी करार करना चाहता है। लेकिन फिलहाल तो पहले समझौते पर ही संकट के बादल मंडराने लगे हैं।ड्ढr ड्ढr यूपीए सरकार की ओर से वाम दलों को समझाने की पूरी कोशिश हो रही है कि आईएइए वार्ता प्रकिया को हर कीमत पर परवान चढ़ाना भारत के हित में है। आईएइए से हुए सेफगार्ड करार के मसौदे के कु छ ठोस बिंदुओं के बारे में सरकार वाम दलों को अगले सप्ताह तक अतिरिक्त जानकारी देगी। वाम दल 23 मई को इस बात पर निर्णायक फै सला लेंगे कि सरकार को आईएइए संचालन समिति से अंतिम समझौता करने देना है या नहीं।

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