DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

तांतिया निर्माण में अचानक गुणवत्ता पर क्यों उठ रहे सवाल

तांतिया हैरान और भौचक है। काम में विलम्ब का आरोप लगातार लगता रहा। सबलेट (पेटी कांट्रैक्ट) के आरोप में फाइन भी लगा। विलम्ब के लिए भी फाइन देना पड़ा। मगर डेढ़ साल में एक बार भी गुणवत्ता पर सवाल नहीं उठाने वाला विभाग अचानक लूट की बात कैसे करने लगा। विभागीय इंजीनियर तो दूर, सूबे की सड़कों की गुणवत्ता जांचने पहुंची अमेरीकी कंपनी ने भी कभी निर्माण गुणवत्ता पर सवाल नहीं उठाये। थर्ड पार्टी क्वालिटी कंट्रोल के लिए चयनित विदेशी एजेंसी ‘एमएसवी इंटरनेशनल इंक’ जिसका मुख्यालय पटना में है और जिसके अधिकारी निर्माणाधीन सड़कों को पार कर दूरदराज की निर्माणाधीन सड़कों का निरीक्षण करने जाते हैं, एक बार भी तांतिया कंस्ट्रक्शन पर गुणवत्ता को लेकर सवाल नहीं उठाया।ड्ढr ड्ढr यहां तक कि तांतिया से काम छीनने के समय विभाग के इंजीनियर ने संबंधित संचिका पर ‘काम में विलम्ब’ का ही आरोप लगाया। विभाग के वरीय अधिकारी भी मानते हैं कि ‘फेस सेविंग’ के लिए गुणवत्ता पर सवाल उठाया जा रहा है। काम छीनने का मूल कारण 80 फीसदी सड़क निर्माण की जगह मात्र 38 फीसदी निर्माण होना बताया गया है। पथ निर्माण विभाग के वरीय अधिकारी भी इस बात पर सहमत हैं कि ‘फेस सेविंग’ के लिए गुणवत्ता पर सवाल उठाया जा रहा है।ड्ढr ड्ढr अधिकारियों की मानें तो दरअसल पटना रोड प्रोजेक्ट का डीपीआर ही अप टू मार्क नहीं बनी। ज्यों-यों काम बढ़ने लगा तांतिया को कई मौखिक निर्देश दिये जाने लगे। जिन सड़कों के किनार नाला निर्माण की बात पहले नहीं थी उसके निर्माण के भी निर्देश दिये जाने लगे। स्वीकृत प्राक्कलन से इतर कार्य के लिए दबाव बनाया गया। अंतत: निर्माण में विलम्ब हुआ और आनुपातिक रूप से काम में देरी के आरोप में तांतिया को सड़क निर्माण से अलग कर दिया गया।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: तांतिया निर्माण में अचानक गुणवत्ता पर क्यों उठ रहे सवाल