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अब अग्नि-4 की है पूरी तैयारी

लगभग साढ़े तीन हाार कि.मी. दूरी तक मार करने में सक्षम अंतर मध्यम दूरी की बैलेस्टिक मिसाइल अग्नि-3 मिसाइल का तीसरा परीक्षण पूरी तरह सफल रहा। उड़ीसा में व्हीलर आईलैंड के पास बुधवार को सवेरे नौ बज कर 56 मिनट पर मिसाइल का परीक्षण किया और यह प्रति सेकेंड चार किलोमीटर की रफ्तार से 800 सेकेंड़ में लक्ष्य तक पहुंचने में सफल रही। इसे रेल से ले जाया जा सकता है और देश के किसी भी भाग से छोड़ा जा सकता है। सूत्रो के मुताबिक यह मिसाइल चीन के शंघाई समेत कई शहरों तक मार कर सकती है लेकिन बीजिंग तक पहुंचने में संहेह है। इसके लिए अब अग्नि-4 तैयार किए जाने का काम चल रहा है। हालांकि आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं की गई है लेकिन बीजिंग तक मार करने के लिए भारत को करीब 5 हाार कि.मी. तक मार करने वाली मिसाइल की जरूरत है। यह जरूरत प्रस्तावित अग्नि-4 मिसाइल पूरी कर सकती है। डीआरडीओ के प्रवक्ता ने बताया कि मिसाइल को अचूक लक्ष्य बेध के लिए इसमें लेजर आधारित नेविगेशन प्रणाली लगाई गई है। गत वर्ष किए गए इस मिसाइल के पहले सफल परीक्षण के बाद का यह उन्नत संस्करण है। परीक्षण को सभी पैमानों पर पूरी तरह सफल बताया गया है। दागे जाने के बाद यह मिसाइल 350 कि.मी. की ऊंचाई पर अंतरिक्ष में गई और फिर तेज गति से वातावरण में प्रवेश करते हुए बंगाल की खाड़ी से पर भू-मध्य रखा के दक्षिण में लक्ष्य पर गिरी। नौसेना के दो जंगी पोत निर्धारित स्थान पर तैनात थे और मिसाइल के प्रभाव को देखा। इसके अलावा कई टेलीमेट्री स्टेशनों से इस मिसाइल की प्रगति पर नजर रखी गई। दो चरणों वाली अग्नि-3 मिसाइल में ठोस ईंधन का इस्तेमाल होता है। इसकी लंबाई 17 मीटर, गोलाई दो मीटर और वजन 50 टन है। यह मिसाइल डेढ़ टन वजनी परमाणु बम को लक्ष्य पर गिराने में सक्षम है। अंतरिक्ष से वातावरण में पुनप्र्रवेश के समय इस मिसाइल पर 35 जी का गुरुत्वाकर्णण बल पड़ता है और तापमान 2500 डिग्री सेल्सियस होता है। तापमान से सुरक्षा के लिए इस मिसाइल को कार्बन मेटेरियल का ताप रोधी कवच होता है। परीक्षण स्थल पर मौजूद अग्नि परियोजना के निदेशक अविनाश चंदर ने कहा कि इस परीक्षण के साथ अब यह मिसाइल सेना में तैनात किए जाने के लिए तैयार है। सूत्रों का कहना है कि सेना को सौंपने से पहले इस मिसाइल का एक और परीक्षण हो सकता है। बाद में प्रशिक्षण के लिए कुछ और परीक्षण किए जाएंगे। परीक्षण के समय रक्षा अनुसंधान व विकास संगठन के कई वैज्ञानिक, राष्ट्रीय सुरक्षा उप सलाहकार शेखर दत्त समेत कई प्रमुख लोग उपस्थित थे। रक्षा मंत्री ए.के.एंटनी ने इस कामयाबी पर वैज्ञानिकों को बधाई दी।

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