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शिकायत किस-किस से

अक्सर आपको खाना, सिनेमा, किसी की बात, हेयर स्टाइल और ड्रेस सेंस पसंद नहीं आता है। तब या तो आप सामने वाले की आलोचना करते हैं या उसे मुफ्त की सलाह देने लगते हैं। उसे ही नहीं, कई बार किसी को गलत ठहराने की कोशिश हमें भी परेशान करती है। एक ओर, उसे महसूस होगा कि आप उसके आत्मसम्मान को ठेस पहुंचा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर, वह यह भी सोच सकता है कि आप उसे मुफ्त की सलाह दे रहे हैं। आप पल भर में किसी की मानसिकता नहीं बदल सकते। हां! थोड़ा डिप्लोमैटिक होकर उसकी नाराजगी से जरूर बच सकते हैं। इस संदर्भ में अलेक्जेंडर पोप का कहना है कि आदमी तब सीखता है, जब उसे सिखाया नहीं जाए, जबकि गैलीलियो का कहना था कि आप किसी इंसान को कुछ भी सिखा नहीं सकते, सिर्फ उसकी खुद की तलाश में मदद कर सकते हैं। मार्टिन लूथर किंग का कहना है कि मैं लोगों को उनके सिद्धांत की बजाय उसके विचारों से जानने की कोशिश करता हूं, न कि खुद के पैमाने से।

डेल कारनेगी के मुताबिक, हमें दूसरों के विचारों का सम्मान करना चाहिए। फिजूल के विवादों से बचने के लिए किसी को गलत न कहें। ओशो कहते हैं कि शिकायत एक लाइलाज बीमारी है। उसे इंसान अपनी कोशिश से ही खुद ठीक कर सकता है। आपका मन हर समय शिकायत करने के बहाने ढूंढ़ता है। अगर एक बार अपना निरीक्षण करेंगे, तब आपको पता चलता है कि दिन भर में सैकड़ों चीजों और लोगों से शिकायतें होती हैं। इस गंभीर आदत से समझ और सजगता से छुटकारा पा सकते हैं। मन में यह तय कर लेना कि कुछ भी हो, शिकायत नहीं करनी है, रोष नहीं जताना है। कुछ समय बाद आपको महसूस होने लगेगा कि जिंदगी का हर पल और आपके आस-पास का सारा माहौल बहुत सुहावना हो गया है और आप इसे नासमझी में यों ही बेकार गंवा रहे थे।       

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