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सपने सुहाने बचपन के

उसने मां के गर्भ में ही टेनिस की आहट सुन ली थी। जब वह गर्भ में थी, मां ने टेनिस मैच देखने शुरू कर दिए थे। टेनिस के दीवाने पिता यही चाहते थे। उन्होंने तय कर लिया था कि चाहे बेटा हो या बेटी, उसे टेनिस खिलाड़ी ही बनाएंगे। फिर परिवार की आर्थिक तंगी और तमाम सामाजिक दुश्वारियां भी उन्हें रोक नहीं पाईं। और उनकी बेटी ने भी वह कर दिखाया, जो उसके पहले दुनिया की कोई और बेटी नहीं कर पाई थी। छह बार दुनिया की नंबर एक रैंकिंग पर रही टेनिस स्टार सेरेना विलियम्स को टेनिस के इतिहास का सबसे बड़ा खिलाड़ी माना जाता है। सेरेना ने जो हासिल किया, निम्न मध्यवर्गीय अमेरिकी परिवारों के बच्चे अक्सर उसके सपने तक नहीं देख पाते। बावजूद इसके कि मिशीगन सिटी में उनके परिवार की जिंदगी आसान नहीं थी। उनके पिता को अपनी छोटी-सी आमदनी में बड़े परिवार का खर्च चलाना था, जिसमें सेरेना की सगी बहन वीनस के अलावा तीन सौतेली बहनें भी थीं। जब यह परिवार मिशीगन को छोड़कर लॉस एंजेलिस में आ गया, तो दुश्वारियां और बढ़ गईं। पांच बेटियों के पिता रिचर्ड विलियम्स को टेनिस का बहुत शौक था। वह खुद तो टेनिस के क्षेत्र में बड़ा कमाल नहीं कर पाए, लेकिन उनकी दिली ख्वाहिश थी कि कम से कम एक बेटी टेनिस में खूब नाम कमाए। रिचर्ड मानते थे कि गर्भ में पल रहा शिशु अपनी मां के जरिये तमाम चीजों के लिए प्रेरित होता है। उन्होंने अपनी पत्नी औरेंसीन को टेनिस की किताबें और टेनिस मुकाबलों के वीडियो लाकर दिए। और औरेंसीन भी तमाम टेनिस खिलाड़ियों की जीवनी पढ़ने में जुट गईं, वीडियो पर टेनिस के मुकाबले तो वह देख ही रही थीं।

बेटियों को खेल के लिए अच्छा वातावरण मिले, इसके लिए रिचर्ड ने उनकी शुरुआती पढ़ाई का इंतजाम घर पर ही किया। सेरेना को तो उन्होंने तीन साल की उम्र में ही टेनिस रैकेट थमा दिया था। सेरेना ने अपना पहला टूर्नामेंट साढ़े चार साल की उम्र में ही जीत लिया था। दस वर्ष की उम्र में वह 49 प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुकी थीं। सेरेना की बड़ी बहन वीनस भी टेनिस की उम्दा खिलाड़ी थीं। वह हर मामले में अपनी बहन की तरह बनना चाहती थीं। जल्द ही उन्होंने वीनस को टेनिस में पीछे छोड़ दिया। जब वह दस साल की थीं, तब उन्होंने अंडर-12 वर्ग की टेनिस  प्रतियोगिता में अपनी बड़ी बहन वीनस को हराकर उनसे नंबर वन का ताज छीन लिया। रिचर्ड के लिए सेरेना को वीनस को हराता देखना एक यादगार मौका बन गया। उनकी उम्मीद पुख्ता हो गई कि यह लड़की अब सभी खिलाड़ियों को पीछे छोड़ देगी।

सेरेना कहती हैं, मैं हर मामले में वीनस की नकल करती थी। वीनस जो कपड़े पहनती थी, मुझे वैसे ही कपड़े चाहिए थे। वीनस जिस चीज की मांग करती थी, मैं भी उसी की जिद पकड़ लेती थी। वैसे वह मेरी सबसे अच्छी दोस्त थी। आज भी हम दोनों में खूब बनती है। पिता काफी कड़क मिजाज थे। सेरेना उनसे बहुत डरती थीं। वह कड़ी धूप में घंटों बेटी से अभ्यास कराते, पर सेरेना कभी उफ नहीं करतीं। वह कभी नहीं कहतीं कि मैं थक गई हूं या आज मेरा मूड नहीं है। पड़ोसी कहते थे कि कहीं यह लड़की प्रैक्टिस करते-करते मर न जाए। और उस बचपन को सेरेना कभी नहीं भूल पाईं- ‘हालांकि बचपन से मुझ पर टेनिस खेलने का दबाव था, पर सच यह है कि मुझे स्कूल जाना बहुत अच्छा लगता था। जब भी मुझे टेनिस अभ्यास से छुट्टी मिलती थी, मैं स्कूल पहुंच जाती थी। आज भी मुझे लिखना-पढ़ना बहुत पसंद है।’  वैसे पढ़ाई के अलावा सेरेना को जिमनास्टिक और बैले डांस भी बहुत पसंद था।

सेरेना के खेल ने रफ्तार पकड़ी, तो उसके पिता को कई तरह की चिंताएं सताने लग गईं। उन्हें हमेशा यह भय रहता कि कहीं उनकी अश्वेत बेटियां नस्ली भेदभाव का शिकार न बन जाएं। डर इतना बढ़ गया कि उन्होंने बेटियों को जूनियर टेनिस प्रतियोगिताओं में भेजना बंद कर दिया। सेरेना ने 1998 से ग्रैंड स्लैम प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेना शुरू किया। जल्द ही जीत का सिलसिला भी शुरू हो गया। पहले साल वह ऑस्ट्रेलियन ओपन के दूसरे दौर में, फ्रेंच ओपन के चौथे दौर में विंबलडन के तीसरे दौर में और यूएस ओपन के तीसरे दौर में पहुंचीं। वर्ष 2002 में वह दुनिया की नंबर एक टेनिस खिलाड़ी बन गईं। तरक्की का सफर जारी रहा। सेरेना ने  साल 2005 के सभी चारों ग्रैंड स्लैम खिताब जीतकर ‘गोल्डन स्लैम’ पूरा किया। टेनिस कोर्ट की कामयाबी उन्हें दूसरे क्षेत्रों में भी ले गई। सेरेना ने फैशन की दुनिया में भी खूब जलवे बिखेरे हैं। न्यूयॉर्क सिटी फैशन वीक में रैंप पर कैटवॉक करती सेरेना को देखकर एक पल के लिए किसी को यकीन ही नहीं हुआ कि यह टेनिस कोर्ट में सबके छक्के छुड़ाने वाली वही सेरेना हैं। फैन्स उनके दीवाने हो गए। लेकिन जब दुनिया सेरेना की फैन है, तो खुद सेरेना अमेरिका की फस्र्ट लेडी मिशेल ओबामा की बड़ी फैन हैं। खासतौर पर वह मिशेल के ड्रेस सेंस से बेहद प्रभावित हैं।

अपने टेनिस करियर की संध्या वेला में वह परोपकारी कामों, खासकर बच्चों की खुशहाली के लिए काम करने में काफी समय देती हैं। वह यूनिसेफ मिशन के तहत दक्षिण अफ्रीका में बच्चों को उच्च शिक्षा प्रदान करने में सहयोग कर रही हैं। सेरेना चाहती हैं कि जिस तरह उन्होंने अपने बचपन के सपने को साकार किया, सारे बच्चे वैसा कर सकें- ‘मेरा मानना है कि सभी बच्चों को अपने जीवन में कुछ करने का मौका मिलना चाहिए। ’ सेरेना के लक्ष्य और सपने अब बदल गए हैं। सेरेना का कहना है कि टेनिस से संन्यास लेने के बाद वह कोच बनना चाहती हैं। बचपन में तंगी और अभाव झेलने वाली सेरेना अब गरीब बच्चों को फ्री में टेनिस की ट्रेनिंग देना चाहती हैं, ताकि साधन के अभाव में गरीब और प्रतिभावान बच्चे कहीं अपने सपनों से दूर ही न रह जाएं। अपने बचपन को याद करते हुए सेरेना कहती हैं, ‘जब मैं छोटी थी, तो मेरे माता-पिता हमेशा मुझसे कहते थे कि जो कुछ तुम्हारे पास है, तुम उससे खुश रहो। कभी किसी की नकल मत करो। खुद अपनी एक अलग पहचान बनाओ। मैं भी सभी लोगों को यही सलाह देती हूं कि चिंता मत करो और हमेशा खुश रहो।  
प्रस्तुति: मीना त्रिवेदी

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