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ब्रजेश से पंगा नहीं लेना चाहती भाजपा

वाजपेयी सरकार के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रहे ब्रजेश मिश्र के पोखरन दो के संदर्भ में दिया गया बयान भाजपा के लिये नई मुसीबत ले कर आया है। मिश्र ने अपने बयान में कहा है कि पोखरण दो पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के देन है।ड्ढr देश को एटमी हथियार क्षमता से लैस करने के आदेश उनके ही थे। मिश्र के इस बयान पर प्रतिक्रिया देने के लिये भाजपा बुधवार को बचती नजर आई। एनडीए सरकार में विदेश मंत्री रहे यशवंत सिन्हा से जब ‘हिन्दुस्तान’ ने इस बाबत जानना चाहा तो उन्होंने इस पर कोई टिप्पणी करने से साफ इंकार कर दिया। वहीं दूसरी ओर भाजपा प्रवक्ता प्रकाश जावड़ेकर ने यह कहते हुये मिश्र के बयान को खारिा कर दिया कि वह खबरों की हेडिंग पर प्रतिक्रिया नहीं देते। असल में भाजपा बृजेश मिश्र से पंगा लेने की स्थिति में नहीं है। भाजपा को पता है कि पार्टी के अच्छे बुर का विस्तृत लेखा जोखा मिश्र के जेहन में है। यदि वह उसका खुलासा कर देंगे तो पार्टी को भारी नुकसान हो सकता है। बीते दस दिन में मिश्र का यह दूसरा धमाका है। इससे पहले वे परमाणु करार पर भाजपा को यह कहते हुये आड़े हाथ ले चुके हैं कि भाजपा को परमाणु करार के रास्ते पर बाधा नहीं खड़ी करनी चाहिये। इससे देश परमाणु मामले में पिछड़ जायेगा। याद रहे कि मिश्र के इस बयान का सामना करने के लिये भाजपा ने अपने दो दिग्गजों पूव विदेश मंत्री जसवंत सिंह और पूर्व संचार मंत्री अरुण शौरी को उतारा था। लेकिन ये दोनों मंत्री बृजेश मिश्र की सीधी आलोचना से बचते रहे। उन्हें संभवत: यह भय सताता रहा कि कहीं मिश्र इस भेद को न खोल दें कि भाजपा मौजूदा परमाणु समझौते को इससे कम शर्तो में मानने के लिये तैयार थी। मिश्र जिस तरह से बार बार कांग्रेस और यूपीए सरकार के पक्ष पर बयान दे रहे हैं उससे भाजपा की बेचैनी बढ़ गई है। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि मिश्र भाजपा को हर मौके पर इसलिये नीचा दिखा रहे हैं, क्योंकि उनको पता है कि आडवाणी के नेतृत्व में यदि कोई सरकार बनती है तो उनकी कोई भूमिका नहीं होगी। इस नेता का कहना था कि मिश्र आडवाणी को पसंद नहीं करते, इसलिये वे अपनी भूमिका कांग्रेस में तलाश रहे हैं।ं

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