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महिला आरक्षण विधेयक को लेकर घमासान

महिला आरक्षण के सवाल पर सत्तारूढ़ यूपीए के अंतर्द्वद्व खुलकर सामने आने लगे हैं। यूपीए में कांग्रेस के भरोसेमंद सहयोगी राजद ने चेतावनी दी है कि अगर विधेयक को इसके मौजूदा स्वरूप में ही पारित कराने की कोशिश हुई, तो वह सरकार से समर्थन भी वापस ले सकता है। वहीं लोक जनशक्ति पार्टी ने महिलाओं के लिए आरक्षण का समर्थन करते हुए भी लोकसभा की एक तिहाई सीटें बढ़ाने तथा उनमें भी अनुसूचित जाति-ान जाति तथा अन्य पिछड़ी जातियों की महिलाओं के लिए कोटा की व्यवस्था किए जाने का सुझाव दिया है। पासवान ने सीधे विरोध करने के बजाए विधेयक पेश किए जाने का समर्थन किया और इसके लिए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी के प्रति आभार व्यक्त किया, लेकिन उन्होंने कहा कि आजादी के बाद देश की आबादी एवं मतदाताओं की संख्या में हुई वृद्धि तथा विधेयक को लेकर शुरू हुए विवाद और आशंकाओं के मद्देनजर लोकसभा की एक तिहाई सीटें बढ़ाई जाएं। उन्होंने विधेयक को अगले सत्र में ही पारित कराने पर जोर दिया। लोकसभा में राजद संसदीय दल के उप नेता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री देवेंद्र प्रसाद यादव ने कहा कि दलित, अल्पसंख्यक तथा पिछड़ी जाति की महिलाओें को कोटे के भीतर कोटा देने की मांग की उनकी पार्टी की मांग को अनसुना कर विधेयक को मौजूदा स्वरूप में पारित कराने की कोशिश हुई तो ‘विरोध में हम किसी भी हद तक जा सकते हैं।’ उन्होंने आरोप लगाया कि आनन फानन में बिना आम सहमति चुपके से विधेयक पेश कर दिया गया। कानून मंत्री हंसराज भारद्वाज के हवाले यह बताने पर कि महिला विधेयक को कैबिनेट की आम राय से ही राज्यसभा में पेश किया गया, राजद नेता ने कहा कि मंत्रिमंडल की बैठक में रेल मंत्री लालू प्रसाद ने इसका खुलकर विरोध किया था।ं

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