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माध्यमिक स्कूलों की जानकारी दें डीईओ

सरकार ने जिला शिक्षा पदाधिकारियों से सूबे के माध्यमिक स्कूलों के बार में रिपोर्ट मांगी है। समान स्कूल प्रणाली आयोग की अनुशंसा के आधार पर केन्द्र सरकार द्वारा चलाए जा रहे सक्सेस (एसयूसीसीईएसएस) कार्यक्रम के तहत माध्यमिक स्तर के स्कूलों की जरूरत को पूरा किया जाना है। फिलहाल राज्य में माध्यमिक शिक्षा के तहत कुल 3000 स्कूल हैं जो कि यहां के छात्रों की संख्या के मद्देनजर नाकाफी हैं।ड्ढr ड्ढr मानव संसाधन विकास विभाग से मिली जानकारी के अनुसार जिन हाई स्कूलों में जमीन-भवन आदि मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हैं उनको उच्चतर माध्यमिक स्कूलों में अपगड्र किया जाएगा। विभाग के माध्यमिक शिक्षा निदेशक के मुताबिक पिछले माह हुई जिला शिक्षा पदाधिकारियों (डीईओ) की राज्यस्तरीय बैठक में उनको निर्देश दिया गया है कि 25 मई तक वे अपने-अपने क्षेत्र के स्कूलों की मैपिंग की कार्रवाई पूरी कर इस बार में मुख्यालय में रिपोर्ट पेश करं। इसके तहत 5 से 8 किलोमीटर के क्षेत्र में माध्यमिक स्कूलों की वस्तुस्थिति सहित उस क्षेत्र के मध्य विद्यालयों को भी चिह्न्ति किया जाना है ताकि जरूरत के मुताबिक उनको भी माध्यमिक स्कूलों में अपगड्र किया जा सके। सभी डीईओ को हाई स्कूलों के संदर्भ में डाटा कैप्चर फार्मेट में शैक्षणिक और भौतिक सांख्यिकी संबंधी रिपोर्ट मुहैया कराने को कहा गया है। इसका मकसद केन्द्र सरकार की तय गाइडलाइन के मुताबिक मध्य विद्यालयों को अपगड्र करना है। ढाई सौ बुनकरों को उन्नत मशीनें दी जाएंगीड्ढr पटना(हि. ब्यू.)। राज्य सरकार रशम वस्त्रों का उत्पादन बढ़ाकर उसके निर्यात की संभावनाएं तलाश रही है। इसके लिए ढाई सौ बुनकरों को सरकार उन्नत मशीनें उपलब्ध कराएगी। बेहतर क्वालिटी का हस्तकरघा, डॉबी और जकार्ड भी उन्हें दिया जायेगा। इसके अलावा बुनकरों को दिये जाने वाले प्रशिक्षण की गुणवत्ता में सुधार लाया जायेगा ताकि एक्सपोर्ट क्वालिटी के रशम वस्त्रों का उत्पादन हो सके।ड्ढr ड्ढr इसके लिए अलग से राशि की व्यवस्था की गई है। सरकार चाहती है कि राज्य से इन वस्त्रों का निर्यात हो सके। निर्यात के क्षेत्र में आगे आने वालों को पुरस्कृत करने की भी योजना है। सरकार का मानना है कि राज्य के बुनकरों में कौशल की कमी नहीं है। अगर कौशल उन्नयन को लेकर थोड़ी मेहनत की जाये तो रशम वस्त्रों का निर्यातक बन सकता है बिहार। टेक्स्टाइल डिााइन में बुनकरों के कौशल उन्नयन के लिए हाजीपुर स्थित सीपेट में प्रशिक्षण की व्यवस्था पूर्व से ही है। लेकिन इस वर्ष बेहतर प्रोडक्ट निकालने के लिए प्रशिक्षण की विशेष व्यवस्था की जा रही है। सरकार ने इसके लिए अलग से बीस लाख रुपये का प्रावधान किया है। विभाग से मिली जानकारी के अनुसार निर्यात से जुड़ी योजनाओं के अलावा भी सरकार ने बुनकरों के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं। नक्सल प्रभावित जहानाबाद और अरवल के अलावा पटना जिला के बुनकरों को मुख्यधारा में लाने के लिए भी योजना शुरू की गई है। इसके तहत वहां के तीन सौ बुनकरों को उपकरण की आपूर्ति की जायेगी तथा लगभग डेढ़ सौ को कर्मशाला सह आवास योजना से जोड़ा जाएगा।

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