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सरकार व ठेकेदारों में ठनी

तांतिया कंपनी से सड़क निर्माण का काम छीनने के मामले में निर्माण एजेंसियां व राज्य सरकार आमने-सामने आ गई हैं। सरकार ने जहां कड़ा रुख अख्तियार करते हुए कहा है कि तांतिया कंस्ट्रक्शन को काली सूची में डाल उसपर आपराधिक मुकदमा दर्ज होगा। वहीं सूबे की बड़ी सड़क निर्माण एजेंसियों ने निर्णय लिया है कि वे तांतिया से छीने गये काम ही नहीं बल्कि सृूबे में इस तरह के अन्य टेंडरों में भी शामिल नहीं होंगे।ड्ढr ड्ढr पथ निर्माण मंत्री प्रम कुमार एवं प्रधान सचिव आरके सिंह ने बुधवार को संवाददाता सम्मेलन में कहा कि तांतिया की बिहार में पटना समेत रलवे व अन्य परियोजनाओं और राज्य उच्च पथों के निर्माण में काम आ रहीं सभी प्लांटों पर लगी मशीनों को जब्त किया जाएगा। कार्य सबलेट करने के एवज में तांतिया पर विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी। पटना की सड़कों को तांतिया की रिस्क एण्ड कॉस्ट पर बनाने का निर्णय किया गया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि कोई यह मत समझे कि वे खराब काम करंगे तो सरकार देखती रहेगी। जो खराब काम करगा, उसका काम रिसाइन्ड होगा और उस एजेंसी को काली सूची में डाला जाएगा। गुंडागर्दी और गोरखधंधा नहीं चलेगा। टेंडर में एजेंसियां नहीं आयीं तो सरकार अपने से सड़क बनायेगी। दूसरी ओर प्रदेश के बड़े ठेकेदारों का संगठन हॉट-मिक्स प्लांट कांट्रैक्टर्स एसोसिएशन ने बुधवार को निर्णय किया कि वे तांतिया से छीने गये (री-साइन्ड) काम के लिए टेंडर नहीं डालेंगे। यहीं नहीं एसोसिएशन ने पथ निर्माण विभाग को पटना रोड प्रोजेक्ट की सभी सड़कों का निर्माण खुद करने की चुनौती भी दे डाली है। एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष कृष्णा सिंह, महासचिव निर्मल कुमार शर्मा एवं वरीय सदस्य सुरन्द्र सिंह ने कहा कि सूबे की निजी निर्माण एजेंसियों को काली सूची में डालने में आगे रहने वाला पथ निर्माण विभाग पुल निर्माण निगम को काली सूची में क्यों नहीं डाल रहा है?ड्ढr ड्ढr इस बीच पटना हाईकोर्ट के न्यायधीश न्यायमूर्ति नवनीति प्रसाद सिंह की एकलपीठ ने तांतिया कंपनी की अर्जी पर सुनवाई करने से इंकार कर लिया। खंडपीठ ने मामले की किसी अन्य पीठ द्वारा सुनवाई करने के लिए अपने यहां से हटाने का आदेश दिया। अब कार्यकारी मुख्य न्यायधीश चन्द्रमौली कुमार प्रसाद की अनुमति से किसी अन्य पीठ के समक्ष मामले की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा। इधर प्रेम कुमार व आर के सिंह ने कहा कि पटना की सड़कें बनाने में पेड़, बिजली पोल समेत किसी तरह की कोई बाधा नहीं है। उन्होंने पटनावासियों को आश्वास्त किया है कि बरसात के पूर्व सड़क किनार बन रहे नालों का निर्माण पूरा किया जाएगा। दो दिनों में मापी समाप्त होगी और दस दिनों में सड़कों का शार्ट टेंडर किया जाएगा। यह पूछने पर कि ठेकेदार आगे नहीं आये तो, उन्होंने कहा कि पुल निर्माण निगम में सड॥क प्रभाग की स्थापना की गई है जो पटना की सड़कों को बनाने में सक्षम है। पहले चरण में उसे कंकड़बाग रोड, बोरिंग रोड समेत कुछ महत्वपूर्ण सड़कें सौंपी जा रही हैं। सिंह ने कहा कि पटना रोड प्रोजेक्ट को तांतिया को 20 महीने में पूरा करना था। 16 महीने में वह मात्र 25 फीसदी काम कर पायी है। साथ ही उसने नियम के विपरीत काम सबलेट किया। उन्होंने बताया कि तांतिया की अब तक 10 करोड़ रुपए जब्त किये जा चुके हैं। इसमें साढ़े तीन करोड़ रुपए फाइन, साढ़े तीन करोड़ बैंक गारंटी और 3 करोड़ सिक्यूरिटी मनी शामिल है। उन्होंने बताया कि तांतिया को काम के एवज में अब तक 35 करोड़ रुपए पेमेन्ट किये गये हैं। इसमें 8 करोड़ रुपए मोबिलाइजेशन एडवांस शामिल है। इसके पूर्व तांतिया को समय पर काम करने के लिए 30 बार नोटिस, 18 बार फाइन, चार बार वर्क प्रोग्राम का पुनरीक्षण और चार बार कारण बताओ नोटिस दिया जा चुका है। काम वापस लेने की कई बार धमकी दी गई पर तांतिया का मालिक मिलने तक नहीं आया। एक महीने से तांतिया के पास अलकतरा नहीं था। उसके पास मशीन, मटीरियल और मैन पावर की कमी थी। इसके विपरीत निर्माण एजेंसियों ने कहा कि विभाग को मुम्बई और दिल्ली की एजेंसियों पर भरोसा है। पुराने पथ निर्माण मंत्री और पथ निर्माण विभाग के आला अधिकारी पहले ही बिहार की सड़क निर्माण एजेंसियों को अक्षम ठहरा चुके हैं। वहीं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अब कह रहे हैं कि पथ निर्माण विभाग सक्षम हो गया है। ऐसी स्थिति में पथ निर्माण विभाग को पटना की सड़कों के निर्माण का जिम्मा लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि पटना ही नहीं भोजपुर, रोहतास, बेगूसराय, मधेपुरा समेत कई जिलों में बाहर की निर्माण एजेंसियां डेढ़ साल में एक भी सड़क का निर्माण पूरा नहीं कर पायी हैं। सार ग्लोबल टेंडर का करीब यही हाल है।

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