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मोदी के मंत्रियों को गलत काम करने से रोकेंगे सचिव

मोदी के मंत्रियों को गलत काम करने से रोकेंगे सचिव

सरकार के काम को पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के मकसद से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वरिष्ठ अधिकारियों की जवाबदेही भी तय कर दी है। मंत्रालयों में सचिवों को यह टूट दी गई है कि उन्हें यदि कोई काम नियमों के अनुरूप नहीं लगता तो वह अपने मंत्री को ऐसा करने से रोक सकेंगे।

सरकार के सभी मंत्रालयों को कैबिनेट सचिवालय  के परफामेर्ंस डिवीजन की ओर से भेजी गई भ्रष्टाचार विरोधी कार्ययोजना में कहा गया है कि यह सचिवों की जिम्मेदारी है कि किसी भी मंत्रालय में कामकाज तय प्रक्रिया के तहत हो, और नीतियां बिना किसी पक्षपात के बनें। मंत्रालय में अधिकारियों के बीच कामकाज के आवंटन में भी पक्षपात नहीं होना चाहिए।

कैबिनेट सचिवालय के सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री ने मंत्रियों के साथ साथ अधिकारियों की भी जवाबदेही तय करने पर जोर दिया है। एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक पीएम मोदी की मंशा साफ है, अब शीर्ष अधिकारी अपने मंत्री के विशेषाधिकार या निर्देशों का हवाला देकर किसी गलत या नियम विरुद्घ काम को हरी झंडी नहीं दे पाएंगे। अगर सचिव या अन्य जिम्मेदार अफसर ऐसा करते हैं तो वे खुद भी  गलती के लिए जिम्मेदार ठहराए जाएंगे।

जिम्मेदारी तय होगी
निर्देशों में कहा गया है कि सचिव अगर नियमों के अनुरूप एहतियात बरतेंगे तो इससे पहले से बेहतर जवाबदेही तय होगी। साथ ही  विशेषाधिकारों का दुरुपयोग करने की स्थिति में संबंधित अथारिटी की जिम्मेदारी तय करने में भी आसानी होगी। सरकार का मानना है कि इससे भ्रष्टाचार पर ज्यादा प्रभावी तरीके से लगाम लगाई जा सकेगी।

नियमों का हवाला देकर बताई सचिवों की जिम्मेदारी
कैबिनेट सचिवालय के परफामेर्ंस डिवीजन की ओर से सभी सचिवों को भेजी गई भ्रष्टाचार विरोधी कार्ययोजना में सचिवों को उनकी  प्रशासनिक ताकत के साथ जिम्मेदारी का एहसास कराया गया है। कार्ययोजना में   केंद्र सरकार के बिजनेस आवंटन नियमावली 1961 का हवाला देकर कहा गया है कि  -भारत सरकार के क्रियाकलाप को संचालित करने के लिए  नियम  में  स्पष्ट है कि विभाग के सभी कामकाज मंत्री के अधीन या उनके विशेष निर्देशों पर ही संपन्न होंगे। जबकि विभागों के सचिवों के संबंध में नियम है कि सभी विभागों में  सचिव प्रशासनिक हेड होगा। सचिव मंत्रलय या विभाग के कामकाज के सुचारू संचालन के लिए जिम्मेदार होगा।  साथ ही सचिव को यह भी देखना होगा कि कामकाज नियमों के अनुरूप हो। 

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अब तक यह कर चुके हैं मोदी
मोदी ने सरकार बनने के बाद मंत्रियों को निजी स्टाफ में रिश्तेदारों की भरती करने से रोका था।
-यूपीए सरकार में काम किए हुए निजी सचिवों और ओएसडी को मंत्रियों के साथ काम करने से रोकने का आदेश जारी किया था।
-सचिवों से सीधे संवाद किया और कहा फैसले लेने में देरी नहीं करें।
-फैसले लेने के लिए फाइलें ऊपर से नीचे कई अधिकारियों के पास घूमती थीं। कैबिनेट सचिव ने कहा ज्यादा से दो या तीन स्तरों पर हो फैसला।  कहा गया कि जिम्मेदारी लेने से बचने के लिए फाइलें अनावश्यक कई स्तरों पर घूमती हैं।
- विभागों में भ्रष्टाचार के मामलों को जल्द निपटाने,विजिलेंस केसेज में जल्द फैसले लेने को भी कहा।

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