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छह घंटे तक नक्सलियों का राज

झारखंड के हाारीबाग जिला में नक्सलियों ने हाइवे पर हड़कंप मचाया। सात मई को दिनदहाड़े बीच सड़क पर घंटों शक्ित प्रदर्शन किया। हाारीबाग से गिरिडीह को जोड़ने वाला नेशनल हाइवे 100 सुबह पांच बजे से ही इनके कब्जे में रहा। अत्याधुनिक हथियारों से लैस एक हाार नक्सली विष्णुगढ़ प्रखंड से आठ किलोमीटर दूर टाटीझरिया के भेलवाड़ा जंगल से निकल कर पंडवा नदी के पास नेशनल हाइवे पर आ गये। इसमें महिलाएं और बच्चे भी काफी संख्या में थे। इन्होंने दो एलपी ट्रक को आड़े-तिरछे खड़ा कर गाड़ियों की आवाजाही बंद कर दी। कुछ नक्सली पेड़ पर चढ़ गये, तो कुछ रोड पर मोरचा संभाल रहे थे। सड़क के दोनों ओर गाड़ियों की लंबी कतारें लग गयीं। गिरिडीह के पुलिस सब इंस्पेक्टर ओलिवर पूर्ति छह पुलिसकर्मियों के साथ रांची आ रहे थे। उन्हें फॉरंसिक लेबोरटरी से रिपोर्ट लेनी थी। प्रात: 8.30 बजे जसी ही उनकी गाड़ी पंडवा नदी के पास पहुंची, नक्सलियों ने अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। इससे ओलिवर पूर्ति की मौत हो गयी, जबकि अन्य जवान घायल हो गये। जब नक्सली जंगलों में घुस गये, तब पुलिस बहादुरी दिखाने वहां पहुंची। नक्सलियों के घने जंगलों में घुस जाने के बाद पुलिस जंगल में आधा किलोमीटर अंदर तक गयी और लगभग 50 राउंड फायरिंग कर लौट गयी। नक्सलियों ने एक सौ राउंड गोलियां चलायी। पुलिस की गोली से कोई नक्सली तो घायल नहीं हुआ, अलबत्ता एक गाय की मौत हो गयी। काफी देर तक पुलिस घटनास्थल तक पहुंचने का साहस नहीं जुटा पायी। बाद में हाारीबाग और गिरिडीह दोनों ओर से पुलिस वहां पहुंची और वाहन मालिकों को जबरन आगे भेजा। अंतत: दोपहर साढ़े12 बजे नक्सली जंगलों में घुस गये और जाम समाप्त हुआ। माओवादियों की यह कार्रवाई 21 अप्रैल को टाटीझरिया में फायिरग के दौरान एक ग्रामीण असलम अंसारी की मौत की प्रतिक्रिया में की गयी। माओवादियों का आरोप था कि स्वयं पुलिसकर्मी आपस में धोखे से गोलियां चलाकर निर्दोष की पहले हत्या की और यह कहते हुए जवाबदेही उन पर डाल दी कि जंगल में रहने वाले लुक-छिप करके ऐसी कार्रवाई की है। इस कारण सड़कों पर वह भी दिन में उतरकर अपनी ताकत दिखाने को संगठन विवश हुआ। पूर सूबे में यह अपने किस्म की पहली वारदात है, जिसमें किसी सड़क को कब्जे में लिया गया। गाय मार कर बहादुरी दिखा रही पुलिस प्रतिनिधि, हजारीबाग बहादुरी की झूठी कहानी गढ़ना कोई हाारीबाग पुलिस से सीखे। नक्सलियों के खुद जंगल की तरफ लौट जाने के बाद मौके पर पहुंची पुलिस मुठभेड़ की झूठी कहानी रच रही है। हद तो यह कि एक ग्रामीण की गाय को मारकर उसका खून दिखाते हुए दो नक्सलियों को मार गिराने का दावा कर रही है। हाारीबाग-गिरिडीह हाइवे पर नक्सली जब तक रहे, पुलिस अपने दड़बे में दुबकी रही। सात घंटे के बाद जब नक्सली जंगलों में चले गये तो घटनास्थल होलंग से एक किलोमीटर पहले पुलिस के जवानों ने हवाई फायरिंग करनी शुरू की। इस दौरान पुलिस ने कुछ ग्रेनेड भी फेंके, जिससे एक गाय की मौत जरूर हो गयी। ग्रामीण बताते हैं कि भेलवारा जंगल में मारी गयी गाय का शव पड़ा है। जंगल में इस जानवर का खून पसरा हुआ है। पुलिस इसी खून को दिखाकर दो नक्सलियों को मार गिराने का दावा कर रही है। पुलिस यह कहने की भूल नहीं कर रही है कि नक्सली अपने मार गये साथियों की लाश लेकर भाग गये। ऑपरशन जारी है, पुलिस डटी है : डीाीपी हाारीबाग की घटना पर डीाीपी बीडी राम ने कहा है कि सूचना मिलते ही गिरिडीह और हाारीबाग के एसपी के नेतृत्व में दोनों ओर से पुलिस उग्रवादियों की ओर बढ़ी। पुलिस को आते देख उग्रवादी भाग खड़े हुए। सड़क जाम हटवा दिया गया। उन्होंने कहा कि पिछले चार महीने में हुए मुठभेड़ में 46 उग्रवादी मार गये हैं। कल रात भी एक सब जोनल कमांडर पकड़ा गया। उसके पास से लैंड माइंस, मोटर साइकिल और अन्य आपत्तिजनक सामान बरामद हुए हैं। उग्रवादी सड़क जाम के बहाने प्रोपगेंडा करके भय पैदा करने की कोशिश कर रहे थे। डीाीपी ने कहा कि पुलिस ने उग्रवादियों की धरपकड़ के लिए छापामारी कर रही है। मुठभेड़ में एक उग्रवादी घायल हुआ: एसपी होलंग में हुई घटना के बाद एसपी प्रवीण कुमार ने कहा कि पुलिस सूचना मिलते ही घटनास्थल पर आयी है। होलंग जंगल की दक्षिणी ओर नक्सलियों से मुठभेड़ हुई है। इसमें एक उग्रवादी घायल हुआ है। तीन केन बम लेकर चल रहे उग्रवादी डर से दो केन बम छोड़कर भाग गये और एक केन बम का विस्फोट किया। पुलिस ने जवाबी कार्रवाई की। दो एचइ बम और 50 राउंड गोली चलायी गयी। एसपी ने कहा कि नक्सलियों की ओर से भी तकरीबन 100 राउंड गोलियां चली हैं। पुलिस जंगलों को घेरकर छापामारी कर रही है। मार जाने के बाद भी घटनास्थल पर चार घंटे तक जाने का साहस नहीं कर पायी पुलिस इंसास राइफल व अत्याधुनिक हथियारों से लैस थे नक्सली तीन जगहों पर घात लगा कर पेड़ों पर मोर्चा बांधे थे नक्सली बड़ी संख्या में महिलाएं और किशोर भी शामिल थे 21 अप्रैल की घटना के विरोध में हुई नक्सलियों की कार्रवाई

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