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वेणुगोपाल को हटाया जाना गलत : सुप्रीम कोर्ट

ेन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डा. अम्बुमणि रामदॉस को बृहस्पवितार को उस समय बड़ा झटका लगा जब सुप्रीम कोर्ट ने प्रख्यात हृदय रोग विशेषज्ञ डा. पी. वेणुगोपाल को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के निदेशक पद से हटाने वाला कानून निरस्त कर दिया। सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के कुछ घण्टे के भीतर ही डा. वेणुगोपाल ने एक बार फिर एम्स के निदेशक का कार्यभार ग्रहण कर लिया। इस बीच, यूथ फॉर इक्िवलिटी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के आलोक में स्वास्थ्य मंत्री डा. रामदॉस के इस्तीफे की मांग की जिसे उन्होंने ठुकरा दिया है। इस फैसले के बाद से एम्स में उत्सव जसा माहौल है। न्यायमूर्ति तरुण चटर्ाी और न्यायमूर्ति एच. एस. बेदी की दो सदस्यीय खण्डपीठ ने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान कानून की धारा 11 में संशोधन करके निदेशक का कार्यकाल सीमित करने वाला प्रावधान निरस्त किया। इस धारा में प्रावधान था कि एम्स के निदेशक का कार्यकाल पांच साल अथवा 65 वर्ष की आयु तक ही होगा। संसद से गत वर्ष इस बार में विधेयक पारित होने और कानून बनने के तुरंत बाद डा. वेणुगोपाल को निदेशक पद से हटा दिया गया था। डा. वेणुगोपाल ने एम्स कानून में किये गये इस संशोधन की वैधता को चुनौती दी थी। डा. वेणुगोपाल की ओर से बहस करते हुये पूर्व कानून मंत्री अरुण जेतली ने इस प्रावधान को दुर्भावनापूर्ण करार दिया था। सुनवाई के दौरान न्यायाधीशों ने भी जानना चाहा था कि इतने प्रतिष्ठित चिकित्सक को सरकार क्यों अपमानित कर रही है जबकि उनका कार्यकाल दो जुलाई को पूरा हो रहा है। इस बीच अंबुमणि रामदॉस ने अपने पद से इस्तीफा देने से भी इंकार कर दिया। भाजपा ने कोर्ट के फैसले के बाद इस्तीफा मांगा था।

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