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जदयू : ताकत समेटने में खटिया खड़ी

बिहार में जदयू जहां बुलंदी पर है, वहीं झारखंड में पार्टी पस्त नजर आ रही है। दो महीने के बाद प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक हुई। महंगाई, भ्रष्टाचार पर आंदोलन की रणनीति बनी। संगठन पर भी चर्चा हुई। इसके साथ ही विधायकों का अनबन और भी गहरा गया। कल तक जलेश्वर महतो का पग-पग साथ देने वाले रमेश सिंह मुंडा संगठन के हाल और महतो की चाल से बेहद खफा हैं। मुंडा का बमकना जदयू को और भी संकट में डाल सकता है। रैलियां अमूमन संगठन में जान फूंकने और ताकत दिखाने के लिए होती हैं। लेकिन झारखंड में जदयू की रैली ने नेताओं में अनबन करा दिया। ताकत नहीं दिखा सके और एकाुटता भी नहीं। रांची में होनेवाली रैली धनबाद में हुई। पार्टी विधायकों की राह अलग-अलग है। जिलों में कार्यक्रम नहीं होता। कार्यालय में बैठकी जरूर लगती है। शीर्ष नेतृत्व भी झारखंड में पार्टी की स्थिति, नेताओं की गुटबाजी और खींचतान से वाकिफ है। भाजपा के साथ तालमेल होने का भी आउटपुट नहीं दिखता। बिहार में जदयू लोस चुनाव की तैयारी में जुटा है, झारखंड में स्थिति उलट। नेता, जमीन, कार्यकर्ता के साथ पहचान रहते हुए भी पार्टी लडख़ड़ाती नजर आती है। पार्टी की आंतरिक लोकतांत्रिक व्यवस्था से खिन्न रमेश सिंह मुंडा ने खुद को किनारे कर लिया है। प्रदेश अध्यक्ष का कहना है कि पार्टी संगठित है। जल्दी कई कार्यक्रम तय किये जायेंगे। इधर पूर्व मंत्री मधु सिंह, रामचंद्र केसरी का पार्टी से कोई लेना- देना नहीं रहता।

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