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समीक्षा बैठकों ने खोली सरकार की भी आंखें

सीएम और विकास आयुक्त के स्तर पर हुई समीक्षा बैठकों में भ्रष्टाचार और अनियमितता के कई गंभीर मामले उाागर हुए हैं। खर्च के बाद भी काम नहीं होने के दर्जनों मामले सतह पर आ गये हैं। इन बैठकों ने योजनाओं की हकीकत पर सरकार की भी आंखें खोली हैं। विकास आयुक्त और वित्त सचिव के तहकीकात से वरीय अधिकारियों में बेचैनी है। विभिन्न योजनाओं में पैसा खर्च होने की तुलना में प्रगति काफी कम है। पांच, छह और सात मई को सीएम की अध्यक्षता में हुई समीक्षा के दौरान यह साफ हो गया कि पीएमजीएसवाइ की स्थिति सबसे खराब है। राज्य सरकार 1500 करोड़ रुपये लूज करने की स्थिति में है। इसे लेकर सीएम ने अफसरों की जमकर क्लास ली। इसी तरह 58 सौ करोड़ रुपये अग्रिम के वर्षों से लटके मामले पर समीक्षा बैठक में सरकार ने सख्त रुख दिखाया। वित्त सचिव ने साफ-साफ कहा है कि अगर इसका समायोजन नहीं हुआ तो सरकार के शीर्ष पर बैठे लोग दोषी होंगे,क्योंकि यह वित्तीय कुप्रबंधन के साथ-साथ वित्तीय अनियमितता का भी मामला है।त्वरित ग्रामीण जलापूर्ति योजना में गड़बड़ी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि बैठक में ही एक अधिकारी ने इसकी जांच कराये जाने का सुझाव दे डाला। पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के सचिव सीएस हैं, जो खुद बैठक में उपस्थित थे। चाईबासा की विभिन्न योजनाओं की 20 करोड़ की राशि एडवांस में लेकर हिसाब नहीं देनेवाले 88 अभियंताओं पर कार्रवाई भी इसी का परिणाम है।

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