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पायलट ही रहने दें, गाइड न समझें!

गत दिनों एक सांसद और एक पायलट के बीच हुई झड़प तो मीडिया में खूब नुमायां हुई लेकिन पायलटों के साथ बदसलूकी करने वालों में नेता ही नहीं बिजनेस क्लास या फर्स्ट क्लास में यात्रा करने वाले यात्री भी पीछे नहीं है। तीन दिन पहले पुणे हवाई अड्डे पर मंडराते हुए एक निजी एयरलाइन के विमान में कुछ एसा ही हुआ। दरअसल पुणे हवाई अड्डा एक वायुसेना अड्डा है। यहां अक्सर लड़ाकू विमानों के अयास चल रहे होते हैं। उस समय किसी भी विमान को उतरने की इजाजत नहीं होती और उन्हें अयास पूरा होने तक मंडराने का आदेश होता है। उस दिन भी एसा ही हुआ। विमान को शाम चार बज कर 45 मिनट पर उतरना था लेकिन अयास के कारण यह 5 बज कर 20 मिनट पर उतरा। बिजनेस क्लास के एक यात्री ने एयरहोस्टेस को डांटते हुए कहा कि पायलट को देरी के बार में यात्रियों को सूचित करना चाहिए। यात्री ने पायलट की योग्यता पर ही सवाल उठाने शुरू कर दिए। उधर पायलट का कहना है कि यात्रियों को पब्लिक एड्रेस सिस्टम (पीए सिस्टम) से संबोधित करने के कुछ नियम होते हैं। दस हाार फुट से कम ऊंचाई, वायुसेना अयास, किसी आपात स्थिति या खराब मौसम से निकलते समय तथा हवाई अड्डे पर उतरने की प्रक्रिया के दौरान पायलट यात्रियों को संबोधित नहीं कर सकते। ज्यादा से ज्यादा वह विमान परिचारकों के जरिए संदेश भिजवा देते हैं क्योंकि उस समय वह विमान नियंत्रण करने जसा कोई अत्यंत महत्वपूर्ण कार्य कर रहे होते हैं जो उड़ान की सुरक्षा से जुड़े होते हैं। अक्सर पायलट एक खास ऊंचाई पर पहुंचने के बाद ही आटो पायलट पर विमान को डाल कर यात्रियों को संबोधित करते हैं। पायलटों का कहना है कि विमान उड़ाने के कुछ महत्वपूर्ण चरण होते हैं जिनमें पायलट को पूरी तरह एकाग्र होना पड़ता है। एसे किसी समय पर पीए सिस्टम से यात्रियों को संबोधित करना ध्यान भटकाता है। यह वैसा ही है जसे तेज गति से कार चलाते हुए कोई ड्राइवर मोबाइल फोन पर बात करते हुए खुद को खतर में डाले। सामान्य स्थिति में पायलट स्वयं यात्रियों को संबोधित करना चाहता है।

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