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यूपीए का वादा पूर करे सरकार : लालू

सत्तारूढ़ यूपीए के दूसर बड़े घटक-राष्ट्रीय जनता दल ने महिला-आरक्षण विधेयक में दलित-पिछड़े और अल्पसंख्यक समुदाय की महिलाओं के लिए अलग क ोटे के साथ ही निजी क्षेत्र में आरक्षण के सवाल को जोरशोर से उठाने को फैसला किया है। निजी क्षेत्र में एफर्मेटिव एक्शन और आरक्षण का मुद्दा यूपीए साझा कार्यक्रम में महत्वपूर्ण मुद्दे के तौर पर दर्ज है। लेकिन यूपीए सरकार को अभी तक इस दिशा में कोई सफलता नहीं मिली। निजी क्षेत्र ने न तो उसकी बात मानी और न ही सरकार की तरफ से कोई कानूनी पहल हुई। कांग्रेस के सबसे भरोसेमंद सहयोगी-राजद अध्यक्ष और रल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने इस मुद्दे पर गठबंधन और सरकार के नेतृत्व से पहली बार अपनी नाराजगी जताई है। साझा कार्यक्रम(सीएमपी) के इस खास मुद्दे पर अब तक की पहल को नाकाफी बताते हुए उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र में एफर्मेटिव एक्शन-आरक्षण की व्यवस्था का इसमें वादा किया गया है। लेकिन इस दिशा में वैसी सक्रियता नहीं दिखाई गई, जसी मौजूदा प्रारूप-आधारित महिला आरक्षण विधेयक को पारित कराने में दिखाई गई। राजद अध्यक्ष ने कहा कि उनकी पार्टी संसद-विधानमंडल में महिलाओं के आरक्षण की विरोधी नहीं है। हम तो बस उसमें दलित-पिछड़े और अल्पसंख्यक समुदाय की महिलाओं के लिए अलग से कोटा चाहते हैं। इससे संसद और राज्य विधानमंडलों में महिलाओं की हिस्सेदारी ज्यादा सुसंगत और प्रतिनिधित्वपूर्ण होगी। हिन्दुस्तान से खास बातचीत में उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय साझा कार्यक्रम में एफर्मेटिव एक्शन पर पूरा एक पैराग्राफ है। यह भी कहा गया है कि इस मुद्दे पर सभी सम्बद्ध पक्षों के बीच तत्काल बहस चलाई जाएगी। प्रयास किया जाएगा कि निजी क्षेत्र में अनुसूचित जाति-ानजाति आदि के युवाओं की आकांक्षाएं पूरी हों और उन्हें जगह मिल सके। कमेटी बनाने से मसले हल नहीं होते। इस बार में ठोस पहलकदमी ली जानी चाहिए। यह बहुत बड़ा मसला है। एक सवाल के जवाब में श्री यादव ने स्वीकार किया कि इस तरह के मुद्दों पर कई दलों और प्रमुख राजनैतिक नेताओं के वह संपर्क में हैं। समय और जरुरत आने पर इन दलों के बीच मुद्दा-आधारित एकता भी बन सकती है।

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