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बाजार के लिये जगह नहीं

बाजार के लिए जगह नहीं राजधानी बनने के बाद भी शहर में लगने वाले सब्जी बाजारों के लिए कोई व्यवस्था नहीं हुई है। समय-समय पर सरकार की ओर से कहा जाता रहा है कि कुछ स्थानों पर स्थायी सब्जी बाजार बनाये जायेंगे। पर यह घोषणा कुछ दिनों में हवा हो जाती है। शहर के सब्जी बाजार सभी जगहों पर सड़क के किनार ही लगते हैं। सुबह से लेकर शाम तक लोग इन्हीं जगहों से सब्जी खरीदते हैं। शहर में लालपुर डिस्टीलरी पुल के पास से लेकर लालपुर चौक तक हर दिन सब्जी बाजार लगता है। बेचने और खरीदने वालों की भीड़ के कारण आवागमन में काफी कठिनाई होती है। लालपुर चौक से कोकर जाने वाले रास्ते में भी अक्सर जाम लगा रहता है। इसी तरह राजभवन के समीप नागा बाबा खटाल के पास मैकी रोड में भी सालों से सब्जी बाजार लग रहा है। बाजार लगने के कारण लोगों का पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है। इसके अलावा बहुबाजार में शनिवार और बुधवार के अलावा हर दिन लगनेवाले सब्जी मंडी, रातू रोड में लाह कोठी के पास, मोरहाबादी मे बुधवार और शनिवार को चुटिया में सड़क के किनार लगनेवाले सब्जी मंडी के कारण यातायात व्यवस्था पूरी तरह से चौपट हो जाती है। सब्जी खरीदने वाले लोगों की भीड़ के कारण आना जाना काफी मुश्किल होता है। इसी तरह सीएमपीडीआइ के सामने भी सब्जी मंडी लगने के कारण अक्सर शाम में सड़क जाम हो जाती है। हाल के दिनों में तो मेन रोड में अलबर्ट एक्का चौक के समीप भी रात आठ बजे के बाद सब्जी मंडी लग रही है। इन सब्जी मंडियों से आम लोगों को सब्जियां तो मिल जाती है, परंतु जिस इलाके में सब्जी मंडी लगती है, वहां दिनभर जाम लगा रहता है। खरीदारों को अपनी गाड़ी पार्किंग के लिए जगह नहीं मिलती है। राजधानी को कैसे सुंदर और व्यवस्थित बने, यह सरकार की जिम्मेवारी है और उसे बनाये रखने के लिए लोगों में जागरूकता। पर यहां स्थिति यह है कि रातू रोड में खाद गढ़ा के पास और कचहरी सब्जी बाजार को छोड़कर कहीं व्यवस्थित बाजार नहीं है। इसमें दोष सब्जी वालों का नहीं, आखिर उन्हें अपनी आजीविका चलाने के लिए कही ंजगह तो चाहिए। जगह के अभाव में इधर उधर बाजार लगाना स्वभाविक है। सरकार को चाहिए कि हर इलाके में सब्जी मंडी के लिए ऐसा स्थान निर्धारित कर, जहां बाजार लग सके और आम लोगों को किसी प्रकार की परशानी नहीं हो। हर इलाके में हो स्थायी बाजार सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिये। राजधानी बनने के बाद शहर का विस्तार हुआ है, इसलिए इसे ध्यान में रखकर हर इलाके में स्थायी बाजार की व्यवस्था की जानी चाहिये।

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