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दो टूक

ोब जागे तभी सवेरा! हाल के दिनों में कोड़ा सरकार और उनके अधिकारियों की टोली में योजनाओं पर पहल और समस्याओं से निबटने का जो उत्साह दिख रहा है वह सराहनीय है। समीक्षा बैठकों में प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना पर सख्ती के साथ क्रियान्वयन का निर्देश हो या शहरी बिजली-सड़क जसी जनसाधारण की जरूरतों पर दिख रही गंभीरता अथवा राज्य की आर्थिक सुदृढ़ता के लिए महालेखाकार के निर्देशों का अनुसरण, माहौल की यह तब्दीली वाकई आशाओं का संचार करने लगी है। सरकार नौकरशाही के तंत्र से चलती है। इधर, ढीली पड़ती नौकरशाही की लगाम भी कसने लगी है। लक्ष्य बहुत निकट नहीं, लेकिन दिशा सही हो और चाल में रफ्तार आ जाये तो दुरूह यात्राएं भी पार लग जाती हैं। टूटे सपने भी आकार लेने लगते हैं।

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