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वेणुगोपाल जीते, पदभार संभाला

उच्चतम न्यायालय ने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के पूर्व निदेशक पी वेणुगोपाल को राहत देते हुए संस्थान के निदेशक की सेवानिवृत्ति की उम्र 65 वर्ष करने संबंधी एम्स संशोधन कानून 2007 को अवैध करार दे दिया। कोर्ट के फैसले के बाद गुरुवार को ही ख्यात हृदय रोग विशेषज्ञ डा. पी़ वेणुगोपाल ने एम्स में अपने पद का प्रभार ग्रहण कर लिया। डॉ़ वेणुगोपाल ने कहा कि अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के निदेशक पद से उन्हें हटान के लिए बनाया गया कानून निरस्त कर उच्चतम न्यायालय ने संसद में बनाई गई योजना को नाकाम कर दिया है। डॉ़ वेणुगोपाल न कहा-मैं बहुत खुश हूं कि उच्चतम न्यायालय ने सच को सर्वोपरि रखा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एम्स के डायरेक्टर वेणुगोपाल को नया कानून बनाकर हटाया जाना गलत है।ड्ढr ड्ढr सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद वेणुगोपाल 5 साल का अपना कार्यकाल पूरा करेंगे। अब वेणुगोपाल 3 जुलाई तक अपने पद पर बने रहेंगे। न्यायमूर्ति तरूण चटर्जी की अध्यक्षता वाली पीठ ने उक्त कानून को चुनौती देने वाली वेणुगोपाल की याचिका पर फैसला सुनाते हुए संस्थान के निदेशक की सेवानिवृत्ति की आयु 65 वर्ष करने या उसका कार्यकाल अधिकतम पांच वर्ष करने का प्रावधान करने वाले एम्स संशोधन कानून 2007 को अवैध करार दिया।ड्ढr ड्ढr मालूम हो कि सरकार ने नवंबर 2007 को एक कानून संशोधन विधेयक लाकर वेणुगोपाल को इस पद से कार्यकाल के पहले ही हटा दिया गया था। डॉ़ वेणुगोपाल की दलील थी कि संशोधन का एकमात्र उद्देश्य डॉ़ रामदास के साथ मतभेदों के चलते उन्हें पद से हटाना था। एम्स अधिनियम से जुड़े इस संशोधन में निदेशक की सेवानिवृत्ति की अधिकतम आयु सीमा 65 वर्ष तय कर दी गई थी जिसकी वजह से डॉ़ वेणुगोपाल को सेवानिवृत्त होना पड़ा था। वरिष्ठ अधिवक्ता एवं पूर्व कानून मंत्री अरुण जेटली ने डॉ़ वेणुगोपाल की ओर से तर्क दिया कि यह अधिनियम गैरकानूनी है क्योंकि उच्च न्यायालय ने पिछले साल मार्च में डॉ़ वेणुगोपाल के निदेशक के पद पर बने रहन के फैसले को बरकरार रखा था। साथ ही यह मामला उच्चतम न्यायालय में लंबित है। लकिन केंद्र सरकार इस बीच ही संसद में संशोधन ले आई।ड्ढr ड्ढr उच्चतम न्यायालय के समक्ष यह मामला पिछले साल तीन दिसंबर को आया था जब डॉ़ वेणुगोपाल और डॉ़ रामदास के बीच एम्स के नियंत्रण को लेकर विवाद काफी गहरा गया था। डॉ़ वेणुगोपाल की याचिका विचारार्थ स्वीकार करते हुए न्यायालय ने उन्हें हटाए जान के तरीके पर नाराजगी जाहिर करते हुए इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया था। न्यायालय ने सरकार से पूछा था एक सम्मानित व्यक्ित को इस तरह अपमानित क्यों किया गया। न्यायालय ने एम्स अधिनियम में संशोधन किए जान की मंशा पर भी सवाल उठाया था जबकि छह माह बाद इस साल दो जुलाई को ही निदेशक पद पर डॉ़ वेणुगोपाल का कार्यकाल खत्म हो रहा था। वेणुगोपाल के लिए यह नैतिक जीत है। उल्लेखनीय है कि वेणुगोपाल तथा स्वास्थ्य मंत्री रामदॉस के बीच विवाद के बाद यह कानून संशोधन विधेयक सरकार द्वारा पारित किया गया था। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद एम्स के रेजीडेन्ट डॉक्टरों ने कहा है कि यह रामदॉस के मुंह पर तमाचा है। उन्होंने रामदॉस के इस्तीफे की मांग की है।

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