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मंत्री पद की धौंस दिखा एजेंसी से जबरन ले ली सरकारी गाड़ी

मंत्री पद की धौंस दिखा एजेंसी से जबरन ले ली सरकारी गाड़ीझारखंड में मंत्रियों की मनमानी की अजीब-अजीब दास्तान सामने आ रही है। अरबों बहाकर राज्य के खेतों को सूखा रखने के लिए चर्चित रहे पूर्व जल संसाधन मंत्री कमलेश सिंह ने अपने कार्यकाल में केशो जलाशय योजना के चल रहे काम के निरीक्षण के लिए खरीदी गयी गाड़ी को घर मंगवा लिया। मंत्री पद से हटने के बाद भी इसे नहीं लौटाया। दबाव पड़ने पर एक गाड़ी तो सरकार को लौटा दी। एक गाड़ी का अभी तक पता नहीं।ड्ढr कमलेश सिंह ने पद पर रहते एजेंसी से सीधे दो स्कार्पियो अपने यहां मंगवा ली थी। वैसे पहले से ही सरकार की दर्जनों गाड़ियां उनकी खिदमत में थीं । सितंबर 2007 में ली गयी स्कार्पियो में से एक डेढ़ साल बाद लौटायी। हुआ यूं कि मंत्री के रूप में उन्होंने हाारीबाग, बरही के जल पथ डिवीजन को दो गाड़ी खरीदने के लिए आबंटन भेजा। वैसे वहां गाड़ी की तत्काल जरूरत नहीं थी। डिवीजन के कार्यपालक अभियंता ने पैसा निकाल कर रांची की एक एजेंसी में अग्रिम 16.10 लाख रुपये जमा करा दिये। जब एजेंसी में गाड़ी आ गयी, तो मंत्री ने वहीं से उन्हें अपने घर मंगा लिया। डिवीजन के रिकार्ड में यह रिसीव भी नहीं हुई।ड्ढr उनका निबंधन कैसे हुआ यह भी सरकारी दस्तावेज में दर्ज नहीं है। गाड़ियां चलती रहीं, पर पैसा जमा करने वाले डिवीजन ने कभी इसकी खोज नहीं की। राष्ट्रपति शासन लगने पर जल संसाधन विभाग ने गाड़ियों के बार में जब तहकीकात की, तो डिवीजन के अधिकारी पूर्व मंत्री के यहां से गाड़ी मांगने लगे। 25 मार्च को मंत्री के आप्त सचिव ने एक गाड़ी डिवीजन को लौटा दी।ड्ढr दूसरी गाड़ी अब तक सरकार के खाते में नहीं आ सकी। अब इसका हिसाब देने में विभाग के कार्यपालक अभियंता के पसीने छूट रहे हैं। मामला राजभवन पहुंच गया है और विभाग के अधिकारी इसे लेकर परशान हैं।

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