अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

कोयले की किल्लत से जूझती बिजली कंपनिया

रीब 22 थर्मल पावर प्लांटों के सामने कोयले की सप्लाई का गम्भीर संकट पैदा हो गया है। इन सभी का रिश्ता सरकारी क्षेत्र से है। ताजा हालत यह है इनमें सिर्फ सात से दस दिन तक के ही कोयले के स्टाक बचे हैं। वैसे सरकारी क्षेत्र के देश में करीब 70 थर्मल पावर प्लांट हैं। जिन थर्मल पावर प्लांटों में कोयले के स्टाक गम्भीर स्थिति में पहुंच गए हैं, उनमें फरीदाबाद,कोरबा पूर्वी, फरक्का, उत्तरी चेन्नई, भुसावल, नासिक वगैरह स्थित थर्मल प्लांट शामिल हैं। जानकार कह रहे हैं कि उपयरुक्त थर्मल प्लांटों के सामने यह संकट तीन कारणों से उत्पन्न हुआ है। पहला,थर्मल कंपनियां कोयला कंपनियों से माल लेने के बाद पेमेंट वक्त पर नहीं करतीं। दूसरा, कई बार रलवे के वैगन भी ढुलाई के लिए नहीं मिलते। तीसरा, चीन ने भी बड़े स्तर पर कोयले का इम्पोर्ट करना चालू कर दिया है। कोल इंडिया लिमिटेड के प्रवक्ता ने कहा कि हमारी तरफ से अपने ग्राहकों को कोयले की नियमित रूप से सप्लाई हो रही है। पर, उरा मंत्रालय में एक अधिकारी ने बताया कि अब कोयला कंपनियां जसे नेशनल कोलफील्ड्स लिमिटेड, कोल इंडिया लिमिटेड और महानदी कोल फील्ड्स वगैरह उन बिजली कंपनियों को कोयले की सप्लाई बंद कर देती हैं, जो चेक देने में लेट-लतीफी करती हैं। कोयले की कमी से जूझ रही कंपनियों के सामने इम्पोर्ट का विकल्प सिकुड़ रहा है क्योंकि चीन ने कोयले की मांग को हाल के दौर में बहुत बढ़ा दिया है।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: कोयले की किल्लत से जूझती बिजली कंपनियां