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तो महिलाओं को भी मिल सकेगा बराबरी का दजा

अगर राष्ट्रीय महिला आयोग का प्रयास सफल रहा तो कृषि क्षेत्र से जुड़ी लाखों महिलाओं को संपत्ति में हक, पुरुषों के बराबर दर्जा और बेहतर मजदूरी नसीब हो सकेगी। आयोग ने कृषि क्षेत्र से जुड़ी महिलाओं की स्थिति में सुधार के लिए एक राष्ट्रीय नीति का मसौदा तैयार किया है। इस ड्राफ्ट में महिलाओं की स्थिति बताते हुए सभी तरह के भूमि सुधार करने और उन्हें कृषि संपत्ति में अघिकार दिए जाने पर जोर दिया गया है। साथ ही लैंगिक भेदभाव खत्म करने, पति-पत्नी दोनों के नाम पर पट्टे बनाने, प्राकृतिक संसाधनों में हक दिलाने और अकेली रहने वाली महिलाओं को अधिकार देने पर जोर दिया गया है। कृषि क्षेत्र का ज्यादातर काम महिलाएं ही करती हैं, फिर भी उनको पुरुषों के मुकाबले बहुत कम मजदूरी मिलती है। इसे बढ़ाने की बात भी ड्राफ्ट में की गई है। ड्राफ्ट के अनुसार कृषि विकास में महिलाओं का बीज और जव विविधता संबंधी पारंपरिक ज्ञान काफी उपयोगी साबित हो सकता है। इसे स्वीकार किया जाना चाहिए और कृषि अनुसंधान में इस ज्ञान का इस्तेमाल होना चाहिए। साथ ही पानी के सभी स्रेतों पर हर वर्ग और जाति की किसान महिलाओं और खेतिहर मजदूरों की पहुंच होनी चाहिए। ड्राफ्ट में कृषि में लगी महिलाओं के स्वास्थ्य और बच्चों की देखभाल पर भी ध्यान दिया गया है। साथ ही वृद्धावस्था पेंशन देने की बात भी कही गई है। आयोग की सदस्य मालिनी भट्टाचार्य के नेतृत्व में आठ सदस्यों के समूह ने कृषि क्षेत्र में महिलाओं के लिए राष्ट्रीय नीति का मसौदा तैयार किया है। इसे और बेहतर बनाने के लिए कृषि क्षेत्र के विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों, अर्थशास्त्रियों और विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों से सलाह-मशवरा किया जा रहा है। मालिनी भट्टाचार्य के अनुसार सबके सुझावों के बाद इसे अंतिम रूप दिया जाएगा। समूह की मंजूरी के बाद ड्राफ्ट केंद्र सरकार के पास भेजा जाएगा। ड्राफ्ट के मसौदे पर विचार-विमर्श के लिए राष्ट्रीय महिला आयोग ने दो दिन की बैठक का आयोजन किया । बैठक के पहले दिन आयोग की अध्यक्ष डा. गिरिाा व्यास ने कहा कि कृषि क्षेत्र से जुड़ी महिलाओं के काम को कम करके आंका जाता है जबकि खेती से जुड़ा ज्यादातर काम महिलाएं ही करती हैं।ड्ढr

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  • Web Title: महिलाओं को भी मिल सकेगा बराबरी का दर्जा