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राजरंग

ूंक, दम लगा कर फूंक। काला झंडा दिखा या लाल-पीला। जेल भरो या रास्ता रोको। इ जमुरा दमवा तो रुकने का नाम ही नहीं लेता। और दिल्ली से देश चलाने, पब्लिक की किस्मत लिखने वाले भी कमाल के हैं भाई। जल्दी ही ठीक हो जायेगा, चेक हो रहा है। पब्लिक धैर्य रखे..। इसी को कहते हैं जबरा मार, रोये न दे। अर ई धैर्य कोई दुकान में तो मिलता नहीं, जो खरीद लायें। पब्लिक परशान हैं। मुद्दा भी फीट है बाबा। गंभीर मामला है। पुतलवा तो जलइबे करंगे। शव यात्रा निकाले हैं। अब श्राद्ध भी करंगे, छोड़ेंगे नहीं। वाकई एकला चलने वाले लाल बाबू के सिपाहियों ने दिल पर ले लिया है। केला ब्रांड के भी नौजवान सड़कों पर उतर हैं। पानी पी-पी कर धिक्कार रहे हैं कमल ब्रांड वाले। तीर छाप वाले भी बांह चढ़ाये हैं। धरना- प्रदर्शन एक कर दिया है। हंसुआ-हथौड़ा वाले सब पीछे पड़ल हैं। लुहान गरमी में लाट साहब के दरबार तक मार्च निकालते थक नहीं रहे। 1में प्याज का दाम बढ़ा था, तो पंजा वालों ने हाय तौबा मची दी थी। मुंह चमकाने लगे थे। कहां हैं गरीब-गुरबन का कथित मसीहा ललटेनवा छाप वाले। अबकी पता लग जायेगा गरीब रामभरोसी के दर्द का।

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