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मान गए पूर्व मंत्री अर्जुन राय

मंत्रिमंडल से हटाए जाने के बाद से ही नाराज चल रहे अजरुन राय आखिरकार ‘मान’ ही गये। शनिवार को बगैर किसी तामझाम के अचानक पार्टी कार्यालय पहुंचकर उन्होंने उपाध्यक्ष की कुर्सी संभाल ली। अब वे बाढ़ प्रभावित जिलों में सरकार और पार्टी के माध्यम से जन समस्याओं के समाधान के लिए संघर्ष करंगे। श्री राय का यह कदम पार्टी के विक्षुब्ध धड़े के लिए करारा झटका है और, इसे आगामी लोकसभा चुनाव से भी जोड़कर देखा जा रहा है। ‘अंडरस्टीमेट’ करने वालों को सचेत करने के लिए उन्होंने कहा कि मैं कोई ‘एक्सीडेन्टल विधायक’ नहीं जो पांच सौ या हजार वोट से चुनाव जीतता है।ड्ढr ड्ढr उपाध्यक्ष बनने के 27 दिनों के बाद यह जिम्मेदारी संभालने वाले श्री राय की नजरों में कैबिनेट विस्तार के बाद से जारी उठापटक तो ‘जीवंत लोकतंत्र’ का परिचायक है। नयी जिम्मेदारी संभालने में देर के सवाल पर वे कहते हैं कि वातावरण बदला तो जनता से फीडबैक लेने चला गया था। मैं एक ऐसे विभाग का मंत्री था जो बैरक में चलता था।ड्ढr ड्ढr अपनी मेहनत से सूचना एवं जनसंपर्क को हाइटेक विभाग बनाया। तो फिर कैबिनेट से क्यों हटाया गया, उनका जवाब है, सरकार चलाने में मुख्यमंत्री के सामने कई तरह के दबाव होते हैं। कोई मजबूरी रही होगी लेकिन सीएम को मेरी कार्यक्षमता पर पूरा भरोसा है। तभी तो मुझे पार्टी को धारदार बनाने जैसी जिम्मेदारी सौंपी है।

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