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चमगादड़ करते गांव की हिफाजत

चमगादड़ों और इंसानों के बीच भावनात्मक रिश्ता। सुनने में थोड़ा अजीब जरुर लगता है लेकिन यह सच्चाई है। वैशाली जिले के सराय थाना क्षेत्र का सरसई एक ऐसा गांव है जहां के कुछ पेड़ों पर हाारों की संख्या में चमगादड़ सैंकड़ों वर्षो से निवास करते आ रहे हैं। इन चमगादड़ों से गांववालों का ऐसा लगाव है कि कोई बाहरी व्यक्ति इन चमगादड़ों की ओर एक पत्थर तक उछालने की जुर्रत नहीं करता। अधिसंख्य ग्रामीण इन्हें देवता की तरह मानते हैं। इतनी बड़ी संख्या में चमगादड़ों की मौजूदगी कभी भी गांववालों के लिए परशानी का सबब नहीं बनी है।ड्ढr ड्ढr चमगादड़ भी यहां कोई दो-चार वर्ष पहले नहीं आए हैं। गांव के बूढ़े-बुजुर्ग बताते हैं कि ये यहां सैकड़ों वर्षो से हैं। उनके दादा-परदादा भी इसके बार में बताते थे। गांववालों का कहना है कि इन चमगादड़ों के कारण ही आज तक उनकी याद में गांव में कोई चोरी-चकारी की घटना नहीं हुई। रात के अंधेर में किसी भी बाहरी व्यक्ति को देख चमगादड़ जोर-ाोर से आवाज कर गांव के लोगोंे को सतर्क कर देते हैं। गांव वाले भी उनकी सुरक्षा को लेकर कोई कोर कसर उठा नहीं रखते। जब कभी किसी नट या बहेलिए ने जाल डाल इन्हें पकड़ने की चेष्टा की, उसे गांववालों का भारी आक्रोश झेलना पड़ा है।ं

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