DA Image
हिंदी न्यूज़   ›   थायरॉइड: समय रहते उपचार जरूरी

एजुकेशनथायरॉइड: समय रहते उपचार जरूरी

लाइव हिन्दुस्तान टीम
Thu, 28 Aug 2014 08:18 PM
थायरॉइड: समय रहते उपचार जरूरी

भारत में चार करोड़ से ज्यादा लोग थायरॉइड से पीड़ित हैं। महिलाओं के इसके शिकार होने की आशंका पुरुषों से चार गुना ज्यादा होती है, पर  समस्या यह है कि अधिकांश को पता ही नहीं होता कि उन्हें थायरॉइड है। इसके लक्षण धीरे-धीरे असर दिखाते हैं, इसलिए पहचान में भी समय लग जाता है। शुरुआती स्तर पर ही इसे पहचानने और काबू में रखने के लिए नियमित जांच जरूरी है, बता रहे हैं प्रसन्न प्रांजल

थायरॉइड मानव शरीर का एक प्रमुख एंडोक्राइन ग्लैंड यानी अंत:स्रावी ग्रंथि है। यह गर्दन के निचले हिस्से में होती है। छोटी-सी यह ग्रंथि शरीर में हार्मोन का निर्माण करती है और मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित रखती है। थायरॉइड ग्रंथि के सही तरीके से काम करने से आशय है कि शरीर  का मेटाबॉलिज्म यानी भोजन को ऊर्जा में बदलने की प्रक्रिया भी सुचारू रूप से काम कर रही है। पर जैसे ही यह ग्रंथि घटनी और बढ़नी शुरू होती है तो मानव जीवन के लिए परेशानियां शुरू हो जाती हैं। इस ग्रंथि का असर हृदय, मांसपेशियों, हड्डियों और कोलेस्ट्रॉल के स्तर पर भी पड़ता है।

थायरॉइड के प्रकार व लक्षण
हाइपोथायरॉइड: इस स्थिति में थायरॉइड ग्रंथि की प्रक्रिया सुस्त हो जाती है, जिस वजह से आवश्यक टी थ्री व टी फोर हार्मोन का निर्माण नहीं हो पाता और अनावश्यक रूप से वजन बढ़ने लगता है। किसी भी काम में मन नहीं लगता, कब्ज रहने लगता है और ठंड भी बहुत लगती है। कई लोगों की आंखों में सूजन, महिलाओं में माहवारी चक्र का अनियमित होना, त्वचा का सूखा और बेजान होना, पैरों के जोड़ों में सूजन व ऐंठन रहना आदि लक्षण दिखने
लगते हैं।

हाइपरथायरॉइड: इस स्थिति में थायरॉइड ग्रंथि तेजी से काम करने लगती है, जिसके कारण टी थ्री और टी फोर हार्मोन अधिक मात्रा में निकल कर खून में मिलने लगते हैं। इस वजह से वजन कम होने लगता है और व्यक्ति दुबलेपन का शिकार हो जाता है। इस स्थिति में व्यक्ति को भूख ज्यादा लगती है और मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं। मन में निराशा हावी हो जाती है। धड़कन बढ़ जाती है और अनिद्रा की समस्या शुरू हो जाती है। पसीना अधिक आता है। गर्मी सहन नहीं होती। दस्त रहने लगते हैं। महिलाओं में माहवारी की अनियमितता और प्रजनन क्षमता में कमी के तौर पर भी इसका असर देखने को मिलता है।

कुछ अन्य लक्षण:
- आवाज भारी होना
- गर्दन में गांठ या सूजन व गर्दन के निचले हिस्से में दर्द
- लगातार सिरदर्द होना
- बोलने व सांस लेने में कठिनाई व  सांस तेजी से चलना (सांस फूलना)
- थोड़े से शारीरिक श्रम में थकान महसूस करना
- अवसाद के साथ-साथ अधिक नींद आना या अनिद्रा की समस्या देखने को मिलती है।

इंडियन जर्नल ऑफ एंडोक्रिनोलॉजी एंड मेटाबॉलिज्म की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2011 में भारत में लगभग चार करोड़ बीस लाख व्यक्ति थायरॉइड के शिकार थे। यह संख्या अब तक और अधिक बढ़ चुकी है। खास यह है कि अधिकतर लोगों को पता ही नहीं होता कि उन्हें थायरॉइड है। इसके लक्षण सामान्य होने के कारण अक्सर लोग जांच में लापरवाही बरतते हैं।  

महिलाएं हैं अधिक शिकार
पुरुषों के मुकाबले महिलाएं थायरॉइड की अधिक शिकार हो रही हैं। तनाव और अवसाद इसकी एक बड़ी वजह है। थायरॉइड की वजह से महिलाओं को मोटापा, तनाव, कोलेस्ट्रॉल, बांझपन, ऑस्टियोपोरोसिस व अवसाद जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। हालांकि इस बारे में कई मिथक भी प्रचलित हैं, जैसे मरीज को जीवनभर दवाओं का सेवन करना होता है या बुजुर्ग महिलाओं को ही थायरॉइड होता है। 

ब्लड जांच से ही पता चलती है बीमारी
शुरुआती स्तर पर पहचान होने पर थायरॉइड को न सिर्फ आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है, बल्कि इससे छुटकारा भी मिल जाता है। पर देर से पहचान होने पर ताउम्र दवा का सेवन करना पड़ सकता है। थायरॉइड की जांच ब्लड टेस्ट से की जाती है। ब्लड में टी थ्री, टी फोर एवं टीएसएच (थायरॉइड स्टिमुलेटिंग हार्मोन) टेस्ट किया जाता है।

क्या है कारण
- थायरॉइड का एक कारण तनाव है। रोजमर्रा की परेशानियां जब नियमित तनाव का कारण बन जाती हैं तो इसका सबसे पहला असर थायरॉइड ग्रंथि पर पड़ता है। यह ग्रंथि हार्मोन के स्राव को बढ़ा देती है।
- कई बार कुछ दवाओं के प्रतिकूल प्रभाव से भी थायरॉइड होता है।
- भोजन में आयोडीन की कमी या फिर नमक का ज्यादा इस्तेमाल भी थायरॉइड की समस्या पैदा कर सकता है।
- परिवार के किसी सदस्य को थायरॉइड होने पर इसके होने की आशंका और अधिक बढ़ जाती है। 
- ग्रेव्स रोग थायरॉइड का बड़ा कारण है। इसमें थायरॉइड ग्रंथि से थायरॉइड हार्मोन का स्राव बहुत अधिक बढ़ जाता है। ग्रेव्स रोग ज्यादातर 20 और 40 की उम्र के बीच की महिलाओं को प्रभावित करता है।
- लगातार ऊंचा तकिया लगा कर सोने, पढ़ने व टीवी देखने से भी थायरॉइड की समस्या हो सकती है।

किन चीजों के सेवन में बरतें सावधानी
- फूलगोभी, पत्तागोभी या ब्रोकली का सेवन न करें।
- सोयाबीन, सोयामिल्क या उससे बने खाद्य पदार्थों का सेवन भी कम करना चाहिए।
- थायराइड रोगियों के लिए धूम्रपान हानिकर होता है। सिगरेट के धुएं में पाया जाने वाला थायोसाइनेट थायरॉइड ग्रंथि को नुकसान पहुंचाता है। 
- जंक फूड और फास्ट फूड का सेवन कम से कम करें।

आयुर्वेद में भी है सफल उपचार
आयुर्वेद में थायरॉइड के सफल उपचार उपलब्ध हैं। मुलेठी, अश्वगंधा, गेहूं का ज्वारा, अलसी, अदरक, इचिन्सिया, बाकोपा, काले अखरोट, नींबी बाम आदि जड़ी-बूटी थायरॉइड के इलाज में लाभदायक सिद्ध होते हैं। एक बार किसी अच्छे आयुर्वेदाचार्य से सलाह लेना आवश्यक है।

स्वयं यूं करें जांच
- शीशे को इस तरह पकड़ें कि गर्दन के बीच वाले हिस्से को देख सकें। थायरॉइड ग्लैंड की यह सामान्य स्थिति है। अब अपना सिर पीछे की तरफ करें। शीशे से यह हिस्सा दिखता रहे। अब पानी पिएं और उसे नीचे की ओर जाते हुए गर्दन में आने वाले उभार या बनने वाले असामान्य आकार पर गौर करें। इस प्रक्रिया को दोहराएं। यदि बार-बार उभार दिख रहा है तो डॉक्टर से संपर्क करें।

योग और संतुलित जीवनशैली है जरूरी
थायरॉइड की बीमारी को दूर करने में एक्यूपंचर काफी मददगार है। इसके अलावा थायरॉइड के मरीजों को नियमित रूप से योग और व्यायाम भी करना चाहिए। इससे थायरॉइड ग्रंथि सुचारू रूप से काम करना शुरू कर देती है। हाइपोथायरॉइड एवं हाइपरथायरॉइड दोनों ही स्थितियों में इसका असर सकारात्मक पड़ता है। आहार विशेषज्ञों  के अनुसार संतुलित खान-पान और व्यायाम से इसे पूरी तरह काबू किया जा सकता है। इससे वजन बढ़ने, थकान एवं अवसाद जैसी स्थितियों से बचने में मदद मिलती है। योग में शवासन सर्वोत्तम है। लेटे हुए  टीवी देखने और पढ़ने से बचें। तकिए का इस्तेमाल न करें। नियमित ब्लड टेस्ट करवाएं।


क्या खाएं
- थायरॉइड के मरीजों के लिए आयोडीन का सेवन काफी मददगार होता है। आयोडीन थायरॉइड फंक्शन को नियंत्रित करने का काम करता है। नमक के अलावा समुद्री शैवाल, समुद्री वनस्पति, मछलियां और  समुद्री जीवों में आयोडीन सबसे अधिक पाया जाता है।
- हरी पत्तेदार व ताजी सब्जियों का सेवन अधिक करें। हालांकि फूल गोभी, पत्ता गोभी का सेवन कम करने की सलाह दी जाती है।
- टमाटर, हरी मिर्च, प्याज व लहसुन खाना भी फायदेमंद साबित होता है।
- विटामिन डी से भरपूर खाद्य पदार्थ जैसे मछली, अंडे, दूध, गाजर और मशरूम का सेवन करें। ये सभी चीजें थायरॉइड को नियंत्रित करने का काम करती हैं।
- थायरॉइड ग्रंथि की सुचारू सक्रियता के लिए सेलीनियम से भरपूर अखरोट व बादाम आदि मेवे लेना हितकर रहेगा।
- काजू और सूरजमुखी का बीज भी खाना बेहतर रहेगा।
- नारियल के तेल का सेवन फायदेमंद होता है।
- गाय का दूध, दही और पनीर का सेवन करें। 
(हमारे विशेषज्ञ: डॉ. रवि मलिक, संयुक्त सचिव, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, डॉ. रेनु मलिक, मलिक रेडिक्स हेल्थकेयर, नई दिल्ली, डॉ. सुषमा कुमारी, डायटीशियन, प्रकाश हॉस्पिटल, पटना)

संबंधित खबरें