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सरकार गठन में देरी से भारत चिंतित

नेपाल मं बड़ी पार्टियों क बीच नई सरकार मं सत्ता साझदारी पर सहमति कायम नहीं हो पान क कारण भारत क कूटनीतिक हलकों मं चिंता बढ़ती जा रही है। नपाल की राजनीतिक अस्थिरता को लेकर भारत की चिंता इस बात स ही पता चलती है कि नपाल मं नवनियुक्त राजदूत राकश सूद न रविवार को माओवादियों क शीर्ष नता प्रचंड स मुलाकात की। सूद की पिछल तीन सप्ताह मं प्रचंड स यह तीसरी मुलाकात है। सूद न प्रचंड स एक घंट चर्चा की जो प्रधानमंत्री पद क लिए अड़ हुए हैं। बैठक मं प्रचंड क सहयोगी बाबूराम भट्टराई भी शामिल थे। भारतीय राजदूत स मुलाकात क तुरंत बाद माओवादी नताओं न तराई की दो क्षेत्रीय पार्टियों क नताओं स ोंट की। ह्रदयश दीक्षित की तराई लोकतांत्रिक पार्टी क 601 सदस्यीय संसद मं 20 और उदय यादव क नतृत्व वाल मधेशी जनाधिकार फोरम क 52 संसद सदस्य हैं। इन दोनों दलों क पास सरकार बनान या बिगाड़न की ताकत है। माओवादियों का सरकार बनान क लिए न कवल तराई क छोट दलों का समर्थन पाना है बल्कि दो बड़ी पार्टियों नपाली कांग्रस व नपाल की एकीकृत कम्युनिस्ट पार्टी माक्र्सवादी-लनिनवादी का भी समर्थन हासिल करना है।

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