गांधीवादी साहित्यकार विष्णु प्रभाकर नहीं रहे - गांधीवादी साहित्यकार विष्णु प्रभाकर नहीं रहे DA Image
6 दिसंबर, 2019|1:37|IST

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गांधीवादी साहित्यकार विष्णु प्रभाकर नहीं रहे

हिन्दी के वयोवृद्ध गांधीवादी साहित्यकार विष्णु प्रभाकर का शुक्रवार आधी रात के बाद निधन हो गया। वह वर्ष के थे। पिछले कुछ दिनों से वह बीमार चल रहे थे। उनके परिवार में दो पुत्र और दो पुत्रियां हैं। उनकी पत्नी का निधन काफी पहले हो गया था। प्रभाकर के पुत्र अतुल प्रभाकर ने बताया कि श्री प्रभाकर को पिछले दिनों महाराजा अग्रसेन अस्पताल में सांस लेने में तकलीफ के कारण भर्ती कराया गया था। करीब दो सप्ताह अस्पताल में रहने के बाद शुक्रवार को आधी रात के बाद पौने एक बजे उन्होंने अंतिम सांसें लीं। श्री विष्णु प्रभाकर ने अपनी वसीयत में अपना संपूर्ण अंगदान करने की इच्छा व्यक्त की थी। इसलिए उनका अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा, बल्कि उनके पार्थिव शरीर को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान को सौंप दिया जाएगा। अतुल प्रभाकर ने बताया कि आयुर्विज्ञान संस्थान को इस संबंध में सूचित कर दिया गया है। आज दोपहर दो बजे विष्णु जी का पार्थिव शरीर एम्स को सौंप दिया जाएगा। विष्णु प्रभाकर का जन्म 1ो उत्तर प्रदेश के मुजफरनगर के मीरापुर गांव में हुआ। उनके पिता का नाम दुर्गा प्रसाद था। श्री प्रभाकर को पद्म विभूषण के साथ ही हिन्दी अकादमी पुरस्कार, श्लाका सम्मान, साहित्य अकादमी पुरस्कार, शरत पुरस्कार आदि कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया था। उनकी प्रसिद्ध कृतियों में अर्धनारीश्वर, धरती अभी घूम रही, डॉक्टर, सत्ता के आर-पार, मेरे श्रेष्ठ रंग एकांकी, आवारा मसीहा, शरतचन्द्र चटर्जी की जीवनी, सरदार शहीद भगत सिंह, योतिपुंज हिमालय शामिल हैं।

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