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शेयर बाजारों में उठापटकचच कचचा दौर रहने की उम्मीद

देश के शेयर बाजारों में आगामी सप्ताह उठापटक का दौर बने रहने की अधिक संभावना है। बीते सप्ताह चार हफ्ते से चली आ रही तेजी को ब्रेक लगा। चौतरफा बिकवाली का दबाव रहने से बीएसई के सेंसेक्स ने 863 अंक तथा एनएसई के निफ्टी ने 246 अंक का गोता लगाया। बाजार विशलेषकों का कहना है कि फिलहाल जो कारक नजर आ रहे हैं, वह शेयर बाजारों की मंदी की तरफ इशारा कर रहे हैं। इसे देखते हुए आगामी सप्ताह उठापटक का दौर बने रहने की अधिक संभावना है। दिल्ली शेयर बाजार के पूर्व अध्यक्ष और ग्लोब कैपीटल मार्केट्स लिमिटेड के प्रमुख अशोक कुमार अग्रवाल का कहना है कि कच्चे तेल की कीमतों में उबाल है। अमेरिका की अग्रणी बीमा कंपनी एआईजी को इस वर्ष की पहली तिमाही में करीब आठ अरब डॉलर का नुकसान हुआ है। विश्व के शेयर बाजारों में मंदी का रुख है, तो देश में मंहगाई की चिंता सताए हुए हैं। गौरतलब है कि 26 अप्रैल को समाप्त हुए सप्ताह में महंगाई की दर 0.04 प्रतिशत और बढ़कर पिछले साढ़े तीन वर्ष के उच्चतम स्तर 7.61 प्रतिशत पर पहुंच गई। श्री अग्रवाल का मानना है कि इस्पात क्षेत्र को लेकर जो अनिश्चितता की स्थिति बनी हुई थी, वह दूर हो गई है, किंतु सीमेंट क्षेत्र में यह अभी बरकरार है। शुक्रवार के कारोबार में अमेरिका के शेयर बाजारों में गिरावट का रुख रहा है। इसे देखते हुए सोमवार को बाजारों पर दबाव दिख सकता है।ड्ढr बीते सप्ताह के पांचों कारोबारी दिवसों में शेयर बाजार बिकवाली के दबाव में रहे। सेंसेक्स 863.05 अंक अर्थात 4.प्रतिशत के नुकसान से करीब एक पखवाडे बाद फिर से 17000 हजार अंक से नीचे उतरकर 16737.07 अंक रह गया। एनएसई का निफ्टी का 245.6 अंक अर्थात 4.6प्रतिशत गिरकर 40 अंक रह गया। मंदी की मार से बीएसई के मिडकैप और स्मालकैप भी नहीं बच पाए। इनमें क्रमश: 3.38 तथा 3.58 प्रतिशत की गिरावट रही।ड्ढr शेयर बाजारों की नियामक संस्था भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने सप्ताह के दौरान नगद कारोबार वर्ग में मार्जिन पर कुछ राहत दी, जिसे नगद और फ्यूचर वर्ग में क्रास मार्जिन की दिशा में शुरुआती कदम माना जा रहा है। सरकार ने महंगाई को काबू में रखने के उपायों के तहत बुधवार को इस्पात निर्माताओं के साथ बैठक की, जिसमें निजी और सरकारी क्षेत्र की कंपनियों ने निर्माण के काम में आने वाले लंबे उत्पादों पर 2000 रुपए और फ्लैट उत्पादों पर 4000 हजार रुपए प्रति टन घटाने पर रजामंद हुई। इसके अलावा अगले तीन माह तक कंपनियों ने कीमतों को स्थिर रखने का फैसला किया।

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