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सेज के नाम पर ठगे गए किसान

मंगलौर जिले के फगीरु गांव के निवासी जहां एक तरफ अपनी जमीन औद्योगिक विकास की भेंट चढ़ जाने से परशान हैं, वहीं कम्पनियों द्वारा की गई वादाखिलाफी से आक्रोशित भी हैं। शहरीकरण से उनका चैनो-अमन तो छिन ही गया था, अब रोी-रोटी का सवाल और बच्चों के भविष्य की चिन्ता भी उन्हें सताने लगी है। कर्नाटक में मंगलौर से करीब 18 कि.मी. दूर स्थित फगीरु गांव कभी अपनी प्राकृतिक छटा से पर्यटकों को आकर्षित करता था। छह वर्ष पूर्व किसानों से विशेष आर्थिक जोन (एसईजेड या सेज) के नाम पर 640 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया गया। सेज के दासर में आने के साथ ही गांव की जमीन की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया। छह सालों के दौरान ही कृषि भूमि की कीमत पांच हाार रुपए प्रति एकड़ से 20 गुना बढ़कर एक लाख रु. पर पहुंच गई। अधिग्रहण के समय किसानों को भरोसा दिया गया था कि कम्पनियां प्रत्येक प्रभावित परिवार के एक सदस्य को नौकरी देंगी। लेकिन समय बीतने के साथ हकीकत भी बदलती नजर आ रही है। गांववासियों का आरोप है कि आज यहां इन्फोसिस और विप्रो जसी कम्पनियों के ऑफिस हैं, लेकिन गांव के किसी भी व्यक्ित को अभी तक नौकरी नहीं दी गई। कम्पनियां अपने वादे से मुकर चुकी हैं।

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