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फैसले से ही होती जज की पहचान

पटना हाईकोर्ट के जज न्यायमूर्ति बारिन घोष ने राज्यभर से आए जिला जजों को नसीहत देते हुए कहा कि जज का काम है न्याय करना और फैसला लिखना। अपने फैसले से ही कोई जज अपनी पहचान कायम करता है। उन्होंने कहा कि कैरियर बनाने और भविष्य को देखने वाले जज कभी भी न्याय नहीं कर सकते। न्यायमूर्ति श्री घोष रविवार को स्थानीय तारामंडल के सभागार में आयोजित दो दिवसीय जिला जजों के सम्मेलन में समापन भाषण कर रहे थे। इसकी अध्यक्षता न्यायमूर्ति एस.एन. हुसैन ने की।ड्ढr ड्ढr इस अवसर पर न्यायमूर्ति चन्द्रमोहन प्रसाद, न्यायमूर्ति विजयेश्वर नारायण सिन्हा, न्यायमूर्ति घनश्याम प्रसाद, न्यायमूर्ति रखा कुमारी तथा न्यायमूर्ति अभिजित सिन्हा सहित राज्य के तमाम जिला जज उपस्थित थे। न्यायमूर्ति श्री घोष ने जिला जजों से कहा कि उन्हें अपने भीतर झांकना चाहिए और खुद से सवाल करना चाहिए कि क्या वे जो न्याय कर रहे हैं उससे संतुष्ट हैं? उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट में जमानत अर्जियों का अम्बार लगा हुआ है। लेकिन ऐसा क्यों है? कभी आपने सोचा है? ऐसा इसलिए है कि आप खुद को अच्छा साबित करना चाहते हैं। कोई यह न कहे कि आपने घूस लेकर जमानत दे दी। इसलिए आप जमानत अर्जियों को रद्द करना ही बेहतर समझते हैं। उन्होंने कहा कि अगर हम गलत नहीं हैं तो कोई हम पर उंगली नहीं उठा सकता। बिना दिमाग का इस्तेमाल किए और बिना कारण बताए केवल दोनों पक्षों की दलीलों की चर्चा कर जमानत की अर्जियों को इसलिए खारिा कर दिया जाता है ताकि कोई कुछ कह नहीं सके। उन्होंने जिला जजों से कहा कि आप चापलूसी छोड़कर अपना काम सही तरीके से करिए। जीवन में हर क्षण न्याय करने की नसीहत देते हुए उन्होंने जिला जजों से न्यायपालिका की छवि को साफ रखने को कहा।ड्ढr ड्ढr विभिन्न समस्याओं की चर्चा करते हुए न्यायमूर्ति श्री घोष ने कहा कि जजों को स्वयं अपना आकलन कर देखना चाहिए कि वे राष्ट्रीय पैमाने पर अपने को कहां पाते हैं? इससे पूर्व प्रात:कालीन सत्र में सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त जज और ई-कमेटी के चेयरमैन न्यायमूर्ति पी.के. बाला सुब्रह्मण्यम के साथ ही न्यायमूर्ति शिवकीर्ति सिंह तथा न्यायमूर्ति नवनीति प्रसाद सिंह ने जिला जजों को संबोधित किया। उसके बाद के सत्र में न्यायमूर्ति घनश्याम प्रसाद ने कम्प्यूटराइजेशन के मुद्दे पर प्रकाश डाला जबकि न्यायमूर्ति नवीन सिन्हा ने अधीनस्थ अदालतों को कम्प्यूटर से जोड़ने की आवश्यकता बताई। भारत सरकार के संयुक्त सचिव रमेश अभिषेक ने कम्प्यूटराइजेशन की दिशा में केन्द्रीय सरकार द्वारा किए जा रहे कार्यो की विस्तृत चर्चा की और कहा कि अदालतों को कम्प्यूटर से जोड़ने का काम जल्दी से जल्दी पूरा किया जाएगा। दोपहर सत्र की अध्यक्षता न्यायमूर्ति अभिजित सिन्हा ने की जबकि न्यायमूर्ति चन्द्रमोहन प्रसाद ने न्यायिक अधिकारियों के कल्याण तथा सुरक्षा को लेकर कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए। सम्मेलन में राज्य के विधि सचिव योगेन्द्र प्रसाद, अपर सचिव संजय कुमार सहित अनेक परिवार न्यायालय के प्रधान जज भी मौजूद थे।ं

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