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जलविहीन हुए सैकड़ों गाँव

तुलसीदास ने अयोध्या चित्रण में लिखा है कि ‘उत्तर दिशि सरयू बह पावन’। अयोध्या के उत्तर बहने वाली सरयू नदी आजमगढ़ के सगड़ी तहसील में घाघरा के रूप में जानी जाती है। इस ऐतिहासिक पवित्र नदी के जलस्तर पर भी सूखे की नजर लग गई है। इससे यह नदी गाँवों से दूर होती जा रही है। इस नदी पर निर्भर सैकड़ों गाँवों के लेागों के सामने पेट पालने की भी समस्या मुँह बाए खड़ी है।ड्ढr देवभाषा संस्कृत में वर्णित एक सूक्ति ‘घरघराते इति घरघरा’। घरघराना अर्थात तेज आवाज के साथ प्रवाहित होना। यह वर्तमान घाघरा (पूर्व नाम घरघरा) नदी का ही स्वभाव रहा है, लेकिन अब घाघरा का प्रवाह मंद हो चला है। इसके किनार सगड़ी तहसील के तीन सौ से अधिक गाँव बसे हैं। घाघरा का निरंतर बनता-बिगड़ता रूप इस क्षेत्र के लेागों को दहशत में डाले रहता है। सूखने के कारण इस नदी की गाँवों से दूरी कहीं तीन किमी तो कहीं पाँच किमी हो चली है। नदी में कहीं 20 फुट पानी तो कहीं घुटने भर। इस समय तो किनार बसे सैकड़ों गाँव जलविहीन हो गए है। तीन किमी की चौड़ाई में बहने वाली यह नदी इस समय पाँच सौ मीटर की चौड़ाई में बह रही है जबकि बारिश के दिनों में यह नदी भयंकर तबाही मचाती है। नदी के किनार केवटहिया नाम से बसे निषादों के एक बड़े गाँव की पूरी आजीविका घाघरा से मछली पकड़ने व बेचने पर आधारित है।ड्ढr वर्ष के जुलाई, अगस्त व सितंबर माह में कहर ढाने वाली घाघरा की मुख्य शाखाएं अप्रैल आते ही अपना अस्तित्व बचाने के लिए जूझने लगती हैं। बढ़ते तापमान से जलस्रोत सूखने के कगार पर है तथा कुछ स्थानों पर पानी सूख जाने से जमीन दलदली हो गई है। पानी की तलाश में इन जलस्रोतों तक पहुँचने वाले दुधारू पशु दलदल में फँसकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर लेते हैं। यही हाल रहा तो देवारा के लोगों के लिए कहीं न कहीं खतरनाक संकेत हैं।

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