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इलाज के नाम पर लिंग परीक्षण न हो : मंत्री

वास्थ्य मंत्री नंदकिशोर यादव ने कहा है कि गर्भावस्था की बीमारियों के इलाज के नाम पर भ्रूण का लिंग परीक्षण नहीं किया जाना चाहिए। अभिभावकों को यदि लिंग की जानकारी दे दी जाए तो इससे कन्या भ्रूण हत्या में बढ़ोत्तरी हो सकती है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में भी लिंगानुपात में काफी अंतर है। स्वास्थ्य मंत्री रविवार को पीएमसीएच में ‘फीटल मेडिसीन’ विषय पर आयोजित अनवरत चिकित्सा शिक्षा कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि फीटल मेडिसीन का उपयोग जन्मजात बीमारियों के नियंत्रण के लिए किया जाना चाहिए।ड्ढr ड्ढr इसके दुरूपयोग की रोकथाम की कोशिश की जानी चाहिए। चिकित्सकों से उन्होंने अपील किया कि चिकित्सा की जो भी योजनाएं बनायी जाए उसे ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचाएं। सरकार अंतिम व्यक्ित तक स्वास्थ्य सेवा पहुंचाने के लिए प्रयासरत है। यह खुशी की बात है कि विश्व के पैमाने पर जो भी आद्यतन शोध किए जा रहे हैं उस पर बिहार के चिकित्सक भी चर्चा कर उस ज्ञान को जनता की सेवा में लगा रहे हैं। सरकार ने नियमित टीकाकरण के लिए मुस्कान एक अभियान की शुरुआत की है। इससे शिशु मृत्यु दर पर नियंत्रण लाया जा सकता है। इस मौके पर डा. मंजु गीता मिश्रा ने कहा कि हजारों बच्चे जन्मजात बीमारियों के कारण समाज पर बोझ बन जाते हैं। गर्भावस्था के दौरान ही ऐसी बीमारियों का निदान संभव है। अधिसंख्य अभिभावक जन्मजात बीमार बच्चों की जवाबदेही चिकित्सकों पर ही डाल देते हैं। डा.प्रज्ञा मिश्रा चौधरी ने बताया कि गर्भावस्था की जन्मजात बीमारियों के परीक्षण के लिए बिहार में सिर्फ अल्ट्रासाउंड जैसी मशीन ही उपलब्ध है। पीएमसीएच की शिशु रोग विभागाध्यक्ष डा.शीला शर्मा और बीओजीएस की अध्यक्ष डा.शांति एच. के.सिंह ने गर्भस्थ शिशु की बीमारियों पर प्रकाश डाला। इस मौके पर कॉलेज के प्राचार्य डा. आर. के. पी. सिंह और अधीक्षक डा.ओ.पी.चौधरी सहित दर्जनों महिला रोग विशेषज्ञ उपस्थित थीं।

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