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मायावती के लिए सात जिले सत्तर पर भारी रहे

बीते एक साल में मुख्यमंत्री मायावती के लिए सात जिले सत्तर पर भारी रहे। हालात कुछ ऐसे बने कि सात जिलों वाले सूखाग्रस्त बुंदेलखंड की प्यासी धरती सियासी घमासान का मैदान बन गई। विशेष पैकेज से लेकर नरेगा के क्रियान्वयन को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का ऐसा दौर चला कि अंतत: मायावती को झांसी में ‘बुंदेलखंड की हकीकत बताआे महारैली’ करनी पड़ी। वैसे तो बुंदेलखंड में वर्षा न होने के कारण सूखे और भुखमरी के हालात पिछले तीन-चार वर्षो से खराब हो रहे थे लेकिन यह राजनीतिक मुद्दा बना गत 13 मई को मायावती के चौथी बार मुख्यमंत्री बनने के बाद। इसकी पहल भी मायावती ने ही की और बाद में कांग्रेस के महासचिव राहुल गांधी द्वारा बुंदेलखंड में दिलचस्पी लेने से कांग्रेस और बहुजन समाजवादी पार्टी (बसपा) के बीच बुंदेलों की धरती पद तल्ख सियासी जंग शुरू हो गयी। दरअसल मुख्यमंत्री मायावती ने सत्ता संभालने के बाद बुंदेलखंड को लेकर पेशबंदी करते हुए दो काम किए। सबसे पहले उन्होंने केन्द्र सरकार से बुंदेलखंड और पूर्वांचल के विकास हेतु 80 हजार करोड़ रुपये का भारी भरकम पैकेज मांगा और बाद में बुंदेलखंड के सूखे के लिए 7016 करोड़ रुपये का पैकेज अलग से मांगा। इतना ही नहीं मायावती ने बुंदेलखंड, पूर्वांचल और पश्चिम उत्तर प्रदेश को अलग राज्य बनाने का समर्थन करते हुए केंद्र को पत्र लिखकर चुनौती दी की वह अलग राज्य बनाने की प्रक्रिया शुरू करे क्योंकि यह केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में है। प्रदेश में केवल समाजवादी पार्टी (सपा) ही अकेली ऐसी राजनीतिक पार्टी है जो उत्तर प्रदेश के विभाजन के खिलाफ है जबकि अन्य दलों को घुमा फिराकर नए राज्यों के गठन के पक्ष में बोलना पड़ा। मायावती ने बुंदेलखंड को लेकर कांग्रेस को अपने अंदाज में घेरने की कोशिश की तो कांग्रेस की आेर से कमान संभाली राहुल गांधी ने। उन्होंने बुंदेलखंड के दौरे पर जाना शुरू कर दिया और केन्द्रीय योजनाआें विशेष कर राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना की समीक्षा करते हुए उन्होंने मायावती सरकार पर निशाना साधा। इसके अलावा राहुल गांधी द्वारा दलितों के घर जाने और उनके प्रति आत्मीयता प्रदर्शित करने को मायावती ने ढोंग करार देते हुए यहां तक कह दिया के दलितों से मिलने के बाद राहुल गांधी को खास साबुन से नहलाया जाता है। राहुल गांधी ने 16 जनवरी को झांसी में जनसभा कर प्रदेश सरकार के रवैये की आलोचना की तो मायावती ने जवाब देने में देर नहीं लगायी। उन्होंने 2ानवरी को झांसी में ‘बुंदेलखंड की हकीकत बताआे महारैली’ कर कांग्रेस का करारा जवाब देते हुए कहा कि कांग्रेस ने आखिर 40 साल के राज में बुंदेलखंड के लिए किया क्या? बुंदेलखंड में सियासी रोमांच भी तैरता रहा। विशेष सुरक्षा दल की सुरक्षा प्राप्त राहुल गांधी ने बगैर प्रशासन को सूचना दिए बुंदेलखंड जाना शुरू कर दिया। दलितों के घर पहुंचने लगे और उनका हालचाल लेने लगे। राहुल गांधी ने 18 अप्रैल को किसानों के साथ उनकी समस्याआें को लेकर पहले धरने पर बैठे और फिर झांसी के मंडलायुक्त को ज्ञापन दिया। मायावती सरकार ने अपने अंदाज में प्रतिक्रिया व्यक्त की। झांसी के जिलाधिकारी राजीव अग्रवाल और मंडलायुक्त पीवी जगनमोहन का तत्काल तबादला कर दिया गया।ं

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