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वोट नहीं नौकरी की चिंता में हैं बेरोजगार

वैश्विक मंदी के चलते नौकरियां गंवाने वाले लोगों के लिए लोकसभा चुनाव कुछ खास मायने नहीं रखता। दरअसल छंटनी के शिकार लोग सबसे पहले नौकरी की तलाश में हैं उसके बाद ही वह नेताओं के नारे और वादे सुनना चाहते हैं। चार महीने पहले एक प्रमुख बहुराष्ट्रीय कंपनी से नौकरी गंवा चुके आईटी कर्मी राजेश पी. ने कहा, ‘‘मुझे पता है कि मताधिकार का इस्तेमाल सभी नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण है लेकिन मैं बहुत निराश हूं और वोट देना नहीं चाहता।’’ राजेश ने कहा, ‘‘मैं छह वर्षो से आईटी क्षेत्र में काम कर रहा था। अब मैं बेकार हूं। किसी दल ने नौकरियां गंवा चुके लोगों के बारे में कुछ नहीं कहा है चाहे वह सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) हो या कांग्रेस या फिर जनता दल सेक्युलर।’’ राजेश जस हजारों और लोग महीनों से दिन रात एक कर नौकरियों की तलाश कर रहे हैं। बेंगलुरू में देश के 40 फीसदी आईटी और बीपीओ कर्मी काम करते हैं और यहां मंदी के कारण अनेक लोगों की नौकरियां जा चुकी हैं और जा रही हैं।ं

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