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डॉलर एक वर्ष के बाद 42 रुपए से ऊपर निकला

इस वर्ष मार्च के दौरान देश के औद्योगिक उत्पादन में पिछले छह साल की सबसे कम वृद्धि के समाचारों से अर्थव्यवस्था के मंदी में जकड़े जाने की चिंता ने अंतर बैंकिग विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर के मुकाबले रुपए की हालत पतली कर दी। सत्र की समाप्ति पर एक डॉलर की कीमत 45 पैसे बढ़कर एक वर्ष के बाद 42 रुपए से ऊपर निकल गई। केन्द्रीय सांख्यिकी बोर्ड की तरफ से जारी आंकडों के मुताबिक मार्च-08 में औद्योगिक उत्पादन मात्र तीन प्रतिशत की वृद्धि हासिल कर पाया, जबकि पिछले साल यह इस दौरान 14.8 प्रतिशत और इस वर्ष फरवरी यह 8.6 प्रतिशत थी। औद्योगिक उत्पादन सूचकांक में फरवरी 2002 के 2.4 प्रतिशत के बाद यह सबसे कम वृद्धि है। आंकडों को देखते हुए विदेशी और निजी बैंकों ने जमकर डॉलर खरीदे, जिससे रुपया खासा दबाव में रहा। कच्चे तेल की रिकार्ड कीमतों के बीच रुपए पर पहले ही दबाव बना हुआ था। सत्र की समाप्ति पर एक डॉलर की कीमत शुक्रवार के 41.60-41.61 रुपए के मुकाबले 45 पैसे अर्थात एक प्रतिशत से अधिक बढ़कर 42.05-42.06 रुपए पर पहुंच गई। डालररुपया विनिमय दर का यह स्तर अप्रैल 2007 के बाद का न्यूनतम है।

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  • Web Title: डॉलर एक वर्ष के बाद 42 रुपए से ऊपर