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ओबामा आगे

ाोशीले, लच्छेदार व कटु बाण छोड़ने वाले भाषणों के बाद सार संकेत दर्शाते हैं कि अमेरिकी राष्ट्रपति पद के चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी की उम्मीदवारी पाने की जंग में हिलेरी क्िलंटन से ओबामा आगे निकल चुके हैं। अब निगाहें सुपर डेलीगेट्स के निर्णायक वोटों पर है, जिसमें ओबामा के जीतने की उम्मीदें हैं। इसलिए, सत्ताधारी रिपब्लिकन पार्टी के प्रत्याशी जॉन मैकेन के साथ उनका मुकाबला लगभग तय है। प्राइमरीा में प्रत्याशियों के मनोनयन की यह लंबी, किंतु दिलचस्प प्रक्रिया बताती है कि राष्ट्रपति चुनने में अमेरिकी जनता की गहन भागीदारी रहती है। इस बार डेमोकेट्रिक पार्टी के लिए एक प्रमुख असामान्य बात यह रही है कि दोनों प्रतिद्वन्द्वी उम्मीदवारों- हिलेरी और ओबामा के बीच वैचारिक कम, निजी घमासान अधिक हुआ। दोनों ने एक-दूसर पर कटु आक्षेप लगाए। इस पर आम जनता ने भले ही चटखार लिए हों, पर चिंताजनक तथ्य पार्टी समर्थकों के दो धड़ों में बंटने की है। अत: संभव है कि ओबामा के प्रत्याशी बनने पर हिलेरी समर्थक आगे के प्रचार अभियान में अपेक्षित उत्साह न दिखाएं। विभिन्न मोर्चो पर बुश प्रशासन की नाकामी के चलते डेमोकेट्र्स की जीत की संभावनाएं बनीं, पर पार्टी की अंदरूनी कटुता से आशंका है कि ओबामा की जीत की संभावना पर कहीं पानी न फिर जाए। यदि ऐसा हुआ तो यह डेमोक्रेट्स की भारी बदकिस्मती ही होगी। यदि इन बाधाओं को पार कर ओबामा राष्ट्रपति चुनाव जीतते हैं तो अमेरिका को सर्वोच्च नेता के बतौर एक कम अनुभव-प्राप्त, पर ताजा चेहरा मिलेगा और वह भी अफ्रीकी अमेरिकी- यह इस देश के इतिहास में नई मिसाल का सूचक होगा। यदि हिलेरी मनोनयन जीतती हैं तो अमेरिकियों को पहली बार महिला राष्ट्रपति चुनने का गौरव मिल सकता है। इससे भी अधिक शानदार उपलब्धि यह हो सकती है कि ओबामा के मनोनीत होने पर हिलेरी उपराष्ट्रपति की उम्मीदवारी स्वीकार कर ले। इससे डेमोक्रेटिक पार्टी की चुनावी जंग को तो मजबूती मिलेगी ही, अश्वेत राष्ट्रपति-श्वेत महिला उपराष्ट्रपति की जोड़ी का अनूठा रिकॉर्ड भी कायम हो सकता है। पर क्या यह मुमकिन है, भावी हालात ही इसका खुलासा करंगे।ं

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