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छात्रों पर अब भी ‘गणित-अंग्रेजी’ का भूत

सरकार कहती है कि ए, बी, सी पढ़ो और बड़ा आदमी बनो। बच्चे हैं कि अंग्रेजी और गणित से जुड़े सवालों को सुनते ही भाग खड़े होते हैं। राज्य में छात्रों के दिमाग से अंग्रेजी और गणित के भय का भूत भगाना आसान नहीं है। प्राथमिक स्कूलों में पढ़ने वाले लगभग एक चौथाई छात्रों के लिए अंग्रेजी और गणित ‘काला अक्षर भैंस बराबर’ है। आठवीं कक्षा तक पढ़ने वाले कुल छात्रों में 22.6 प्रतिशत बच्चे अंग्रेजी के कैपिटल लेटर भी नहीं पहचानते हैं। एक से नौ तक की गिनती नहीं जानने वाले बच्चों की संख्या भी 12.4 प्रतिशत है।ड्ढr ड्ढr आशाजनक यह है कि सरकार के प्रयासों का प्रभाव आहिस्ता- आहिस्ता दिखने लगा है। देश भर में शिक्षा के क्षेत्र में काम करने वाली संस्था ‘असर’ के सव्रे को सच मानें तो राज्य में अंग्रेजी शिक्षा की यह स्थिति सरकारी प्रयासों के बाद है। पूर्व के वर्षों में स्थिति इससे ज्यादा खराब थी। हालांकि गणित के मामले में कोई परिवर्तन नहीं हुआ है। यह विषय आज भी बच्चों को आकर्षित करने में विफल है। आठवीं कक्षा तक के कुल छात्रों में औसतन 1प्रतिशत छात्र ही अंकों को घटाना जानते हैं। संस्था का मानना है कि हाल के वर्षो में सरकारी विद्यालयों में पढ़ाई के स्तर में कुछ सुधार हुआ है लेकिन अगर निजी स्तर पर चलाये जाने वाले प्राथमिक स्कृलों के अंकड़े इसमें से हटा दिये जायें तो स्थिति भयावह दिखेगी। कम से कम अंग्रेजी के मामले में तो यही सच्चाई है। हालांकि सरकार ‘अंग्रेजी क्ष फन’ कार्यक्रम से सरकारी स्कूलों के बच्चों में अंग्रेजी के प्रति ललक जगाने की कोशिश कर रही है। अधिकारी इसकी सफलता का दावा भी करते हैं और सरकार इस कार्यक्रम का विस्तार भी करने पर विचार कर रही है।ं

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