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महादलित कार्ड की काट खोजने में जुटा राजद

राजद नीतीश सरकार के महादलित कार्ड की काट खोजने में जुटा है। इसके लिए दलितों के मोर्चे पर राज्य सरकार की विफलता के तथ्य जुटाए जा रहे हैं। दल के राष्ट्रीय महासचिव श्याम राक यह बता रहे हैं कि पिछले ढाई वर्षो में बिहार में दलितों पर एक लाख से अधिक अत्याचार की घटनाएं हुई हैं तो केन्द्रीय पर्यावरण राज्य मंत्री श्रीमती कांति सिंह बताने में जुटी हैं कि नरगा के तहत दलितों को काम मिल ही नहीं रहा है।ड्ढr ड्ढr दल के प्रदेश प्रधान महासचिव सांसद रामकृपाल यादव का दावा है कि नीतीश सरकार के कार्यकाल में दलितों पर जितना अत्याचार हुआ उतना किसी और के शासन में नहीं हुआ। केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्री रघुवंश प्रसाद सिंह भी इस बार बिहार आए तो तथ्यों की बाढ़ भी लाए। उन्होंने कहा कि महादलितों के लिए विश्व बैंक से र्का मांगने वाली सरकार उनके लिए मंगनी का पैसा नहीं ले रही हैं। बिहार में अभी भी हाारों परिवार सिर पर मैला ढोने के काम में लगे हैं। केन्द्र सरकार ने इनके पुनर्वास के लिए प्रशिक्षण की व्यवस्था की है। एक परिवार के प्रशिक्षण के लिए केन्द्र सरकार 14 हाार रुपये देती है। बिहार इस मद में दो वर्षो से एक भी पैसा केन्द्र से नहीं ले सका है। केन्द्र ने बिहार सरकार से दलित टोलों को एप्रोच रोड से जोड़ने का प्रस्ताव मांगा था लेकिन प्रस्ताव यहां से गया ही नहीं। मैट्रिक पास करने वाले दलित छात्रों की छात्रवृति का पैसा दो वर्षो से राज्य को नहीं मिल रहा है। केन्द्र सरकार ने वर्ष 2006-07 में इस मद में बिहार को 32 करोड़ रुपये दिए थे। बिहार सरकार ने इसके खर्च का हिसाब नहीं दिया और नतीजा यह हुआ कि वर्ष 2007-08 में राज्य को इस मद में पैसा नहीं मिला।ं

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