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अब कृषि विकास की योजनाएं खेतों में बनेंगी

ृषि विकास की योजनाएं खेत- खलिहानों में बनेंगी। अब दिल्ली में बनी योजनाएं किसानों पर थोपी नहीं जाएंगी। योजना बनाते समय इलाके की प्रमुख समस्याओं के अलावा भौगोलिक बनावट का भी ख्याल रखा जाएगा। किसानों को भी इसमें सहभागी बनाया जायेगा। केन्द्र ने राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के लिए यही निर्देश जारी किया है। केन्द्र सरकार गांवों में बनी उक्त योजना के आधार पर ही इस बार राष्ट्रीय कृषि विकास योजना की राशि का आवंटन करगी। फिलहाल योजना बनाने के लिए हर जिले को दस-दस लाख रुपये दिये गये हैं।ड्ढr ड्ढr राज्य सरकार ने इस पर काम करना शुरू कर दिया है। कृषि विभाग के सचिव सीके अनिल ने सभी जिला कृषि अधिकारियों को इस संबंध में आदेश निर्गत कर दिया है। सभी जिलों में समेकित जिला कृषि योजना बनाने की निर्देशिका भी भेज दी गई है। समन्वय का काम बामेति को सौंपा गया है। बामेति के निदेशक डा. आरके सोहाने ने बताया कि सभी जिलों में योजना बनाने के लिए मिली राशि भी जल्द ही भेज दी जायेगी। जानकारी के अनुसार समेकित जिला कृषि योजना बनाने के लिए पंचायत स्तर से जिला स्तर तक समिति बनाई जायेगी। जिला समिति के अध्यक्ष जिला परिषद के अध्यक्ष होंगे, जिलाधिकारी समिति के उपाध्यक्ष और जिला कृषि पदाधिकारी सदस्य सचिव होंगे। कृषि से संबंधित सभी विभागों के जिला प्रमुख, कृषि विश्वविद्यालय या कृषि विज्ञान केन्द्र के दो सदस्य, नाबार्ड के डीडीएम, अग्रणी बैंक के प्रबंधक और जिला सूचना अधिकारी के अलावा एक एनजीओ इसके सदस्य होंगे। इसी तरह की समितियां पंचायतों में भी बनेंगी जिसके अध्यक्ष मुखिया होंगे। प्रखंडों में बनने वाली समितियों के अध्यक्ष प्रखंड प्रमुख और संयोजक प्रखंड विकास अधिकारी होंगे। जानकारी के अनुसार किसानों की सहभागिता से बनी पंचायतों की योजना के आधार पर प्रखंड में और फिर प्रखंड की योजना के आधार पर जिलों में योजना त्ैायार की जायेगी। राज्य की योजना भी जिलों में बनी योजना के आधार पर ही बनेगी।

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