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मम्मी भी नहीं हैं और पापा भी नहीं रहे..

‘मम्मी भी नहीं है और पापा भी नहीं रहे, करं तो क्या करं? बस चचा हैं। कुछो ठीक नहीं लगता है।’ सोमवार को जनता दरबार में उस समय बड़ी कारुणिक स्थिति उत्पन्न हो गई जब कैंसर की वजह से मौत के शिकार हुए जदयू कार्यकर्ता श्रवण कुमार की पांच वर्षीया पुत्री अपनी दो अन्य बहनों के साथ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के समक्ष फफक पड़ी। मुख्यमंत्री ने तत्काल उन्हें कल्याण विभाग के मंत्री व सचिव के पास भेजा। स्व. श्रवण की पांच पुत्रियां और एक बेटा है और अब उन बच्चों को उसका भाई सतीश ही देखता है। बच्चों की मां भी पहले ही चल बसी है। ऐसे में ‘टुअर’ की तरह जिन्दगी जीने वाले इन बच्चों का दर्द देख जनता दरबार में कई आंखें नम हो गईं। मुख्यमंत्री खुद उन बच्चियों को देख भावुक हो गए और उन्होंने तत्काल उनकी परशानी दूर करने को कहा। सोमवार को मुख्यमंत्री स्वास्थ्य, शिक्षा व कल्याण विषय से जुड़ी समस्याओं को सुन रहे थे।ड्ढr ड्ढr समस्तीपुर के मुरादपुर की शमशाद बेगम के पति मो. अब्दुल की दोनों किडनी खराब हो चुकी है और अब वह जीवन और मौत से संघर्ष कर रहा है। कहीं कोई उम्मीद नहीं बनी, लिहाजा अंतिम किरण के रूप में शमशाद मुख्यमंत्री के दरबार में फरियाद लेकर आई है। विभागीय मंत्री नंदकिशोर यादव ने दो दिनों में उनकी समस्या के समाधान का भरोसा दिया तो उसे मानो सारा जहां मिल गया। इस्लामपुर के कोरमा स्थित माता कस्तूरबा उच्च विद्यालय की छात्राएं स्कूल नहीं जातीं। उनके श्रम के साथ खिलवाड़ किया गया है। यही नहीं सरकार की कल्याण योजनाओं से भी उन्हें मरहूम रखा गया है। उन्हें न तो वृक्षारोपण के पैसे मिले और न ही साइकिल। पोशाक भी नहीं मिल पायी है। पैसा मांगने पर मैडम गाली देती है।ड्ढr ऐसे में स्कूल जाकर क्या करंगी। उनकी बात सुनकर मुख्यमंत्री बेहद नाराज होते हैं और नालंदा डीएम को तत्काल पूर मामले की जांच का निर्देश देते हैं। मुख्यमंत्री ने लगभग तीन बजे तक फरियादियों की समस्याएं सुनीं।

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