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बैंकों ने निकाल दी योजना की हवा

दस्तकारों व बुनकरों को आर्टिजन और वीवर्स कार्ड उपलब्ध कराने की सरकारी घोषणा की हवा निकल गई है। हजारों बुनकरों में महज सौ बुनकरों तथा हजारों दस्तकारों में से चार सौ को ही कार्ड मिले हैं। महाजनों व बिचौलियों के चंगुल से बचाने के लिए सरकार ने सभी दस्तकारों व बुनकरों को आर्टिजन कार्ड तथा वीवर्स कड्रिट कार्ड उपलब्ध कराने की घोषणा की। सरकार ने अपने इरादे का काफी जोरशोर से प्रचार प्रसार भी कराया। लेकिन पिछले तीन सालों में नजीता निकला ढाक के तीन पात।ड्ढr ड्ढr अधिकारियों व बैंकों की उदासीनता ने सरकार के संकल्प पर पानी फेर दिया। बुनकरों के हित की बात करनेवाले लोग भी कुछ नहीं कर रहे हैं। बुनकर और दस्तकार आज भी महाजन, बिचौलिए और बड़े व्यापारियों की चक्की में फंसे हुए हैं। व्यावसायिक बैंक कड्रिट कार्ड देने मेंआनाकानी करते हैं। अधिकारियों या संबंधित विभाग के लोगों ने भी इसमें दिलचस्पी नहीं दिखाई। जिले में 40 हजार से अधिक बुनकर हैं लेकिन वीवर्स कार्ड मात्र सौ के पास ही हैं। आर्टिजन कार्ड की स्थिति भी खराब है। ढाई साल पहले सरकार ने घोषणा की थी कि हर दस्तकार को आर्टिजन कार्ड मिलेगा। यही कारण है कि राज्य में पंजीकृत दस्तकारों की संख्या केवल 44336 है। भागलपुर में 5473 दस्तकारों में से फकत 3ो ही आर्टिजन कार्ड मिला है। बुनकर कल्याण समिति के सदस्य कहते हैं कि बुनकरों को कड्रिट कार्ड देने के मामले में बैंकों का रवैया ठीक नहीं है। भागलपुर में आर्टिजन कार्ड के लिए 1056 आवेदन स्वीकृत हैं लेकिन कार्ड सिर्फ 3ो ही मिला है।

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