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खेती और विकास से बढ़े रोजगार के अवसर

वैशाली जिले से मजदूरों का पलायन पहले भी कम ही होता था। इस बार तो पलायन हुआ ही नहीं। गेहूं की अच्छी पैदावार से मजदूरों को आसानी से काम मिल गया। केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं ने भी रोगार के खूब अवसर दिए। जिले में खेतिहर मजदूरों की तादाद 2,42,15है। सबको जोड़ दें तो असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों की संख्या 3,4है। इसके बावजूद अधिक पारिश्रमिक देने पर भी खेती की जरूरत के लायक मजदूर नहीं मिलते हैं। हाल के वर्षो में खेती के प्रति बढे झुकाव से गांवों में ही रोगार के इतने अवसर पैदा हो गए है कि किसानों को सरकार द्वारा निर्धारित दैनिक मजदूरी 78रूपये पर तो मजदूर मिलते ही नहीं। हाजीपुर के श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी बताते है,यहां गांवों में भी 0 रूपये से कम मजदूरी नहीं है। इस जिले के लोग राजधानी में भी मजदूरी करते हैं। सरकारी योजनाओं में भी बड़ी संख्या में मजदूर खप गए हैं। एनडीए की सरकार का गांवों की ओर रूख है। जिले में अभी लगभग दो हाार योजनाएं चल रही हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने तीन सौ करोड़ से भी अधिक की लागत पर उनमें से 1753 योजनाओं का पिछले वर्ष शिलान्यास किया था।ं

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  • Web Title: खेती और विकास से बढ़े रोजगार के अवसर